इन दिनों की सुर्खियों में छाई अक्षय कुमार की फिल्म ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ का ट्रेलर देखकर अब वो महिलाएं भी शौचालय के लिए आवाज बुलंद करने लगी हैं जो अपनी दिक्कत किसी को बताने में संकोच करती थीं। हम बात कर रहे हैं पुलिस विभाग में तैनात महिला सिपाहियों और होमगार्डों की।
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यूपी के औरैया जिले में टॉयलेट महिला सिपाहियों की कथा बनकर रहा गया है। यूं तो वे सबकी दिक्कतें और परेशानियां सुनती हैं। सबको समस्या से निजात दिलाने की कोशिश करती हैं। लेकिन, खुद की दिक्कत किसी से नहीं कह सकती हैं।
कोतवाली और शहर के थानों में महिला सिपाहियों और होमगार्डों की हालत कुछ ऐसी ही है। कोतवाली और थानों के महिला शौचालय गंदे और जाम पड़े होने से उनको रोज सुबह लोटा लेकर बाहर निकलना पड़ता है।
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अफसरों की लापरवाही इस कदर है कि उनका इस ओर ध्यान ही नहीं जाता है। यहां आने वाली महिला फरियादियों को भी इस समस्या से रूबरू होना पड़ता है। कोतवाली में महिला शौचालय पूरी तरह से गदंगी और कूड़े के ढेर से पटा हुआ है। जिसे देखकर ही अंदर जाने की हिम्मत नहीं होगी। मेन गेट से अंदर आते ही दाईं तरफ बने टॉयलेट में दरवाजा ही नहीं है, जर्जर दीवारें, पॉलीथिन के पड़े होने से पानी के निकासी की नाली चोक हो चुकी है। इतनी गंदगी में जाना तो दूर की बात उसके बगल में खड़ा होना तक मुश्किल है।
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कोतवाली में मौजूदा समय में पांच महिला सिपाही हैं। जिन्होंने बताया कि शौचालय गंदा होने से उन्हें बाहर ही जाना पड़ता है। जिससे उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां पर आने वाले फरियादियों को भी टॉयलेट करने के लिये बाहर जाना पड़ता है। इनमे महिला फरियादियों को अधिक दिक्कत उठानी पड़ती है।
औरैया शहर में कोतवाली के अलावा दिबियापुर, अहिरवां कटरा, अयाना, सहायल और बेला थानों की स्थिति भी बदतर है। हर थाने में दो से तीन महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। लेकिन शौचालयों की परेशानी से सबको दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। सीओ सिटी भास्कर वर्मा ने कहा कि कामों की व्यस्तता के चलते इस ओर ध्यान कम जाता है। जल्द ही सफाई कर्मी को बुलाकर टॉयलेट की साफ-सफाई कराई जायेगी।