कानपुर। सरकारी कार्यालयों का भ्रष्ट सिस्टम तो देखिए, जिंदा रहते ही एक महिला को मार डाला। नगर निगम से जारी मृत्यु प्रमाणपत्र और तहसील सदर से जारी पारिवारिक सदस्यता प्रमाणपत्र की मानें तो इंदु रानी पत्नी शीतल प्रसाद की मौत (दीर्घायु की कामना) 18 दिसंबर 2015 को ही हो चुकी है। दरअसल, यह सब उनकी जमीन हड़पने के लिए किया गया और सरकारी सिस्टम आंखें मूंदे सब कुछ करता भी रहा। जालसाजों की मजबूती का अंदाजा इसी से लगता है कि फर्जी कागजातों के सहारे उन्होंने महिला की जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्री दफ्तर से एक व्यक्ति के नाम पॉवर ऑफ अटार्नी भी करा ली। तहसील दिवस में आई शिकायत पर एसडीएम सदर डीडी वर्मा के आदेश पर तहसीलदार अनिल की जांच में हकीकत सामने आई। पारिवारिक सदस्यता प्रमाणपत्र निरस्त करने के साथ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
65बी सावित्री नगर सनिगवां रोड निवासी शीतल प्रसाद अग्रहरि ने तहसील दिवस में 17 मई को अर्जी देकर कहा कि उनकी पत्नी इन्दु रानी अग्रहरि की ग्राम कठोगर में कृषि भूमि है। इसे हड़पने के लिए उन्हें मृत दिखाकर नगर निगम से फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया गया। इसके आधार पर तहसील से पारिवारिक सदस्यता प्रमाणपत्र भी जारी करा लिया। इसलिए फर्जी पारिवारिक सदस्यता प्रमाणपत्र और मृत्यु प्रमाणपत्र निरस्त कराया जाए। तहसीलदार ने लेखपाल विजय कुमार को जांच दी। वह मौके पर पहुंचे तो इन्दु रानी जिंदा मिलीं। उन्होंने लेखपाल को अपना वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज दिखाए।