पुखरायां। नगर के राजेंद्र नगर स्थित गेस्ट हाउस में शुक्रवार रात साहित्य सभा में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं पढ़कर सामाजिक परिदृश्य का चित्रण किया। व्यंग, छंद और कविताएं सुनकर तालियां बजाकर कवियों को उत्साहित करते रहे।
कवि गोष्ठी का शुभारंभ पूर्व प्रधानाचार्य मुनि नाथ सचान ने किया। कवि बच्चन शाह ने बिन प्रेम के नेम न श्याम मिलैं, हिय कंज खिलैं नहि श्याम बिना छंद पढ़ा। इसके बाद कवि आलोक मिश्र ने कैसी है ए तस्वीर गांव की, कैसी है ए तस्वीर।
सारे दर्द राम के हिस्से, रावण है बेपीर कैसी है ए तस्वीर कविता पढ़कर जमकर वाहवाही लूटी। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के जिलाध्यक्ष संजीव कुलश्रेष्ठ ने झूठ का सच कभी दोस्त कह नहीं पाए, रेतक के महनों का गुरुर सह नहीं पाए। हम तो उस झील के पानी हो खामोश रहे, छल के दरिया में ए उसूल बन नहीं पाए कविता पढ़ी। कवियत्री रजनी त्रिपाठी ने कवि होना आसान नहीं यह सबको संज्ञान नहीं, कौन-कौन से अक्षर जोड़े सबको यह पहचान नहीं कविता पढ़ी।
जिला संयोजक सार्थक ने रितु वसंती आ गई भौंरा हुआ नीलाम, सार्थक काली बाजार में लगा रही थी दाम कविता पढ़ी। साहित्य सभा के संरक्षक डॉ. संदीप बंसल, डॉ. विनोद सचान, अफरीदी बाबा, अनूप सचान, जैनुल बसर ने भी काव्य पाठ किया। यहां इंद्र कुमार सचान, रामप्रकाश कटियार, विक्रांत सिंह, प्रवीण सचान, कृपाल सिंह, डॉ. विवेक सचान, हर्ष गुप्ता आदि रहे।