कानपुर में कोरोना विजेताओं में मौसमी वायरल संक्रमण सांस तंत्र की जटिलताएं पैदा कर रहा है। कोविड से रोगी ठीक तो हो गए लेकिन उनका सांस तंत्र कमजोर पड़ गया है। रेस्पेरेटरी सिंसिटियल, एडिनो और इंफ्लुएंजा वायरस के संक्रमण से रोगियों की सांस की नली में सूजन आ रही है और फेफड़ों की झिल्ली में पानी भर जा रहा है। साथ ही निमोनिया हो रहा है। हैलट में आने वाले सांस तंत्र के रोगियों की हिस्ट्री ली गई तो उनमें अधिकतर कोरोना विजेता निकल रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य मौसमी वायरल संक्रमण से कोरोना विजेता अधिक संवेदनशील हो गए हैं। हैलट समेत अन्य अस्पतालों में 10 हजार कोरोना विजेता पंजीकृत हैं। मौसमी वायरल संक्रमण में रोगियों की अस्थमा अटैक जैसी हालत हो जाती है। फेफड़ों की झिल्ली प्ल्यूरा में पानी उतर आता है। न्यूमोनाइटिस हो जाता है और शरीर का ऑक्सीजन लेवल घटने लगता है। नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन के सेंट्रल जोन चेयरमैन और सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. एसके कटियार का कहना है कि कोरोना के दीर्घकालीन प्रभाव पर नजर रखी जा रही है। जिन रोगियों के फेफड़ों में कोरोना से क्षति हुई है, उनमें जटिलताएं बढ़ जाती हैं।