कानपुर। चीनी उद्योग के विकास को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय काॅन्फ्रेंस का आयोजन 21 मई से लखनऊ में किया जाएगा। उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन के बैनर तले होने वाली इस काॅन्फ्रेंस का विषय चीनी उद्योग: भविष्य के लिए सतत विकास का मार्ग विषय रखा गया है। इसमें विमानन ईंधन, हरित हाइड्रोजन तथा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस-मशीन लर्निंग विषय पर मंथन किया जाएगा।
मंगलवार को हर्षनगर स्थित एक होटल में एसोसिएशन के महासचिव दीपक गुप्तारा और नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक प्रोफेसर नरेंद्र मोहन ने पत्रकारों को बताया कि काॅन्फ्रेंस में चीनी उत्पादक राज्यों के अलावा थाईलैंड, नेपाल, मिस्र, ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका आदि देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस मौके पर एक्सपो का भी आयोजन किया जाएगा। काॅन्फ्रेंस में आठ सत्र होंगे।
उन्होंने बताया कि एक सत्र में जर्मनी के मार्क बर्क हार्ट गन्ने और रस की जांचों और इमैन्युअल सेरीर चीनी और मशीन की लागत के संबंध में अपनी प्रस्तुति देंगे। इथेनॉल उत्पादन के आगे की स्थिति पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि एक सर्वे के जरिये पता चला कि 40 फीसदी चीनी उपभोक्ता लेते हैं और 60 फीसदी चीनी फार्मास्युटिकल्स और दूसरे बिजनेस हाउस खरीदते हैं। सबको अलग-अलग गुणवत्ता की चीनी की जरूरत होती है।
चीनी उद्योग में बायो युग की शुरुआत हो गई। बलरामपुर की मिल ने बायो प्लास्टिक का प्लांट शुरू किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के सत्र में गन्ने का उत्पादन घटा है। कॉंफ्रेंस में गन्ने की नई प्रजातियां विकसित करने पर भी चर्चा की जाएगी।