हालांकि समाज के डर और बदनामी से बचने के लिए महिला अपने गांव लौट आई। दो दिन पहले उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज में जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) को जन्म दिया। बताया जाता है कि मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होकर घर लौटते ही बच्चों की सौदेबाजी का खेल शुरू हो गया। ग्रामीणों की मानें तो बेटे को गांव के ही एक व्यक्ति को एक लाख रुपये में और बेटी को पास के गांव के एक परिवार को 80 हजार रुपये में बेच दिया गया।
हैरत की बात यह रही कि इस सौदेबाजी के दौरान गांव के कई लोग गवाह के तौर पर मौजूद रहे। सौदा पूरा होते ही महिला रकम लेकर गांव से चली गई। विशुनगढ़ थानाध्यक्ष शशिकांत कनौजिया ने बताया कि फिलहाल यह मामला आधिकारिक तौर पर उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि कोई लिखित शिकायत या तहरीर मिलती है, तो मामले की गहनता से जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामला संज्ञान में आया है, जिसके लिए चाइल्ड लाइन की टीम को मौके पर भेजा जाएगा और इसकी जांच कराई जाएगी। नवजात को बेचना अपराध की श्रेणी में आता है। बच्चों को गोद लेने की भी एक कानूनी प्रक्रिया है, जिस पर बाल कल्याण समिति निर्णय लेती है। - उवैदुर्रहमान सिद्दीकी, जिला प्रोबेशन अधिकारी