यूपीसीए और जिला प्रशासन के लिए इससे ज्यादा लानत क्या होगी कि बीते एक अक्तूबर से चल रही टिकट बिक्री की व्यवस्था नहीं सुधार सके। सालों बाद ग्रीन पार्क में अपने खिलाड़ियों को देखने की हसरत लेकर टिकट खरीदने जा रहे शहरियों पर पुलिस अपनी नाकामी छिपाने के लिए लाठियां बरसा रही है।
शहरी टिकट के लिए बेइज्जत और चुटहिल हो रहे हैं। क्रिकेट की दीवानगी देखिए कि क्रिकेट प्रेमी डंडा खाकर भी टिकट पाना चाहते हैं। सवाल है कि इतने बड़े आयोजन के लिए यूपीसीए और जिला प्रशासन के पास टिकट बिक्री का क्या इससे बेहतर तरीका नहीं था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या कोई दूसरा सिस्टम नहीं था? सोमवार को स्टूडेंट गैलरी और सी पब्लिक के टिकटों की बिक्री के दौरान व्यवस्था की धज्जियां ऐसी उड़ीं कि जगह-जगह हादसे होते बचे।
बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस बल टिकट खरीदने वालों की लाइन ठीक से नहीं लगवा सके। टिकट बिक्री शुरू होने से पहले ही जबरदस्ती प्रवेश करने पर पुलिस ने सुबह 8.30 बजे ही डंडे बरसाने शुरू कर दिए। फिर जो जहां मिला, वो पीटा गया। आधे घंटे बाद जब टिकट की बिक्री होने लगी तो फिर से हुड़दंग शुरू हो गया।
पुलिस ने फिर लाठी भंाजी और क्रिकेट प्रेमियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। पिटाई का आलम यह था कि पुलिस की लाठी के सामने महिलाएं, युवतियां या बूढे़, बच्चे जो भी पड़े लाल हुए बिना आगे नहीं जा सके। पुलिस वाले बिना लाइन के टिकट लेते रहे। बवाल की आशंका को देखते हुए सीओ कोतवाली, ग्वालटोली, कर्नलगंज समेत अन्य थानों की फोर्स मौजूद रही।