तेजी से करवट लेता मौसम उम्रदराज लोगों व बच्चों के लिए स्वास्थ्य की समस्याएं भी लेकर आता है। सर्दियों के मौसम में शरीर में तापमान में गिरावट और विटामिन डी की कमी हो जाती है। ठंड के शुरू होते ही खून में गाढ़ेपन की वृद्धि होने से हृदय रोगियों का जोखिम बढ़ जाता है। इससे लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
ठंड में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए
डेमो पिक
कानपुर देहातः जिला अस्पताल के सीएमएस व फिजीशियन डॉ. पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि ठंडा मौसम तनाव को बढ़ावा देता है। खासतौर पर उम्रदराज लोगों में तनाव व हाइपरटेंशन बढ़ जाता है। सर्दियों के अवसाद से ग्रस्त लोगों को अत्यधिक चीनी, ट्रांस फैट और सोडियम वाले भोजन से बचना चाहिए। यह मधुमेह व उच्च रक्तचाप वाले मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है।
तापमान कम होने से खून के थक्के जमने की समस्या बढ़ जाती है क्योंकि ब्लड प्लेटलेट्स ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। ठंड की वजह से दिल की धमनियां ज्यादा सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त व आक्सीजन का बहाव दिल की ओर कम हो जाता है। इससे रक्तचाप बढ़ जाता है। यह हार्ट के मरीजों के लिए खतरनाक स्थिति होती है।
ऐसे लोगों को ठंड में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ठंड में आमतौर पर स्वस्थ लोगों को गरम चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
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दिल पर दबाव न डाले नियमित रूप से धूप में बैठे और उचित व्यायाम करें।
अत्यधिक व्यायाम से दिल पर दबाव पड़ता है जिससे थकान आती है। सर्दियों में व्यायाम करने में ध्यान रखने की जरूरत है। थोड़ा-थोड़ा आराम करते रहे ताकि चलते वक्त अचानक थकान महसूस न हो।हृदय रोगी अत्यधिक ठंडे मौसम में सुबह जल्दी टहलने न जाएं बल्कि सूर्य निकलने के बाद ही टहलें। यह उनके लिए लाभदायक होगा।
अपने कोलेस्ट्रॉल का ध्यान रखें क्योंकि सर्दियों में यह असंतुलित हो सकता है। कुछ भी अजीब महसूस होने पर तुरंत डाक्टर से संपर्क करें। ज्यादा कोलेस्ट्रॉल से दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है।
सीने में हल्की सी भी बेचैनी, पसीने, जबड़े, गर्दन, बाजू व कंधे में दर्द, सांस का टूटना आदि समस्याओं को बिलकुल नजरंदाज न करें। इन लक्षणों के समझ में आते ही मेडिकल सहायता लें।