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जानें, आखिर क्यों इस दिवाली पटाखा कारोबारियों की निकल गई हवा, इन सभी ने सुनाया दुखड़ा

Sat, 14 Oct 2017 01:26 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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आतिशबाजी कारोबारियों के लिए साल में यही एक मौका कमाई का आता है। वैसे भी बाजार मंदा चल रहा है ऐसे में ये मुसीबत कारोबार की कमर ही तोड़ देगी। पटाखा कारोबारियों का कहना है किसी ने ब्याज पर तो किसी ने पत्नी के जेवर बेचकर दुकान में रुपया लगाया है। ऐन मौके पर बाजार हटाने से उन्हें लाखों का नुकसान होगा। पटाखा बाजार में पटाखों की 16 बड़ी दुकानें हैं।
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  कानपुर बिठूर के नानाराव पार्क से पटाखा बाजार हटाने के हाईकोर्ट के आदेश से यहां दुकानें लगाए पटाखा कारोबारी सकते में हैं। उनका कहना है कि लाखों रुपये दांव पर लगे हैं। अब ऐन मौके पर दुकानें कहां ले जाएं, प्रशासन तुरंत कोई व्यवस्था नहीं कराता तो बरबाद हो जाएंगे।  
 

पटाखा व्यापारियों की जुबानी

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शहर भर के लोग नानाराव पटाखा बाजार से ही खरीदारी करते हैं। अभी तक हम लोगों के पास हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं आई है। आदेश मिलने के बाद जानकार वकील से सलाह लेने के बाद आगे फैसला लेंगे। -राजू हाशमी, अध्यक्ष आतिशबाजी उद्योग व्यापार मंडल -   हाईकोर्ट के आदेश का पालन होगा। नई जगह दुकान शिफ्ट करने के लिए जिला प्रशासन के साथ बैठक करेंगे। इस फैसले से पटाखा व्यापारियों का भारी नुकसान होगा। -उपाध्यक्ष आतिशबाजी उद्योग व्यापार मंडल    पटाखा व्यापारियों ने लाखों रुपये कर्ज लेकर दुकानें लगाई हैं। दुकान हटाने से हम सभी को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। पटाखे खरीदने के लिए शहर के लोगों को अब भटकना पड़ेगा। पटाखा बाजार में सभी दुकानें मुस्लिमों की हैं। मुस्लिम व्यापारियों को तंग करने के लिए याचिका लगाई गई और फैसला भी आ गया। -सरताज आलम   

हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करने वाले रफत महमूद की जुबानी

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व्यापारी जनहित देखा, जाति-धर्म नहीं हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करने वाले रफत महमूद को पटाखा कारोबारियों ने धर्म का हवाला देकर रोकना चाहा। इसके बाद भी उन्होंने जनहित देखा जाति-धर्म को नहीं। बात नहीं बनी तो पटाखा व्यापारियों ने रुपये का लालच और अन्य लाभ भी देने का प्रयास किया। इसके बाद भी रफत अपनी याचिका पर अडिग रहे और आखिरकार मेहनत रंग लाई। जिसके लिये क्षेत्रीय लोग लंबे समय से परेशान थे, रफत की याचिका को कोर्ट ने संज्ञान में लेते हुए पटाखा बाजार हटाने का फैसला दिया। जिला प्रशासन ने नहीं सुनी रफत महमूद ने बताया कि पहले उन्होंने पटाखा बाजार हटाने के लिए डीएम और कमिश्नर को लिखित पत्र दिया था।   सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर काटने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया। जान से मारने की मिल रही धमकी रफत ने बताया कि याचिका दायर करने के बाद से लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है। इसके बाद भी याचिका वापस नहीं ली और अंत में सत्य की जीत हुई। रफत ने बताया कि वह अपनी सुरक्षा के लिए डीएम और एसएसपी को भी लिखित सूचना देंगे।

याचिका में इन बिंदुओं को बनाया आधार रफत महमूद ने अपनी याचिका में लिखा कि नानाराव पार्क शहर की बीच में 30 एकड़ में बसा है। यह पार्क शहीदों की पुण्य स्थली भी है, यहां पर आजादी की लड़ाई के दौरान कई क्रांतिकारी शहीद हुए थे। इसमें रोजाना सैकड़ों मॉर्निंग वॉकर टहलने आते हैं। पटाखों से गिरने वाली बारूद से जमीन बंजर हो रही है। पटाखा बाजार में रोजाना हजारों ग्राहकों के आने-जाने से हरियाली को क्षति पहुंच रही है।  
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इसके साथ ही इन बिंदुओं को भी रखा- पटाखा बाजार बनाने के लिए पार्क में खुदाई करके बल्लियों को गाड़ा और टीनशेड लगाया जाता है। जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।  माल लेकर भारी वाहन पार्क के अंदर आते-जाते हैं। बाजार में जाने के लिए पब्लिक पार्क के अंदर तक अपनी कार, बाइक ले जाती है।  व्यापारी और ग्राहकों के लिए पार्क में ही चाय, नाश्ता, पान-मसाला, सिगरेट की दुकानें लगी हैं। पार्क में शौचालय नहीं होने से कर्मचारी खुले में लघुशंका और गंदगी फैलाते हैं। कई बार पटाखों का सैंपल भी दिखाया जाता है, या फिर ग्राहक खुद चेक करते हैं जिससे प्रदूषण होने के साथ ही आग लगने का भी खतरा है।
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