जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नाक, कान व गला (ईएनटी) और एनेस्थीसिया के डॉक्टरों ने मरीज को बिना बेहोश किए थायराइड ग्रंथि का ऑपरेशन करने में सफलता पाई है। मरीज बात करता रहा और डॉक्टर ऑपरेशन करते रहे।
कानपुर में पहली बार इस विधि से ऑपरेशन हुआ है। मरीज पूरी तरह ठीक है और इलाज में मामूली खर्च आया है। दावा है कि प्राइवेट अस्पतालों में इस विधि से ऑपरेशन नहीं होता है।
सरसौल के भिओली गांव निवासी ग्रेजुएशन के स्टूडेंट अविनाश (20) पुत्र लालमणि द्विवेदी के गले में कुछ दिनों पहले सूजन आने लगी। डॉक्टरों ने थायराइड ग्रंथि बढ़ने की बात कही। फिर वह हैलट में ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कनौजिया से मिला। दो दिन पहले डॉ. कनौजिया और एनेस्थीसिया के डॉ. अपूर्व अग्रवाल ने ऑपरेशन किया।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि ऐसे ऑपरेशन में अब तक मरीज को बेहोश किया जाता था। कभी-कभी असावधानीवश मरीज के वोकल कार्ड (आवाज की नस) या किसी अन्य नस को नुकसान पहुंच जाता था। मरीज के होश में आने के बाद ही इसकी जानकारी हो पाती थी। नई विधि से मरीज के गर्दन में इंजेक्शन लगाकर ऑपरेशन वाले हिस्से को ही सुन्न किया जाता है।
मरीज बात करता रहता है और ऑपरेशन हो जाता है। बात करने से हम जान जाते हैं कि वोकल कार्ड या अन्य नसें पूरी तरह सुरक्षित हैं। खाने में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल न करने के कारण यह बीमारी होती है।