(कानपुर देहात)। औरैया जिले के जौरा में गुरुवार दोपहर मंगलपुर थाना क्षेत्र के असवी निवासी सगे भाईयों समेत तीन किशोरों की नदी में नहाते समय डूबकर मौत होने से गांव में मातम छाया रहा। देर शाम शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया। परिवार के लोगों का हाल बेहाल रहा। वहीं गांव के लोग भी गमगीन रहे।
असवी निवासी सगे भाईयों हर्ष (13), आर्यन (15) व उनका गांव निवासी दोस्त कृष्णा (14) एक इंटर कॉलेज में एकसाथ पढ़ते थे। गुरुवार की दोपहर एक बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर औरैया जिले के जौरा स्थित सेंगुर नदी में नहाते समय डूब गए। पानी में दम घुटने से तीनों की मौत हो गई। शव बरामद होने के बाद जैसे ही तीनों के शव गांव पहुंचे तो गांव में सन्नाटा पसर गया। गांव से परिजन के रोने-बिलखने की ही आवाज सन्नाटे को चीरती हुई लोगों के कानों में पड़ रही थी। जिससे वहां मौजूद हर ग्रामीण की आंखे गमगीन नजर आई। सगे संबंधी व परिवार के लोग एक दूसरे को ढांढस बंधाते रहे।
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सगे बेटों की मौत से दिनेश की उजड़ गई दुनिया
दिनेश ने बताया कि उनकी पत्नी की लगभग तीन वर्ष पहले बीमारी से मौत हो गई थी। जिससे उन्हें दो बेटे आर्यन व हर्ष थे। आर्यन कक्षा नौ व हर्ष आठवीं कक्षा का छात्र था। पत्नी की मौत के बाद वह बेटों के सहारे ही जी रहे थे। अब उनकी मौत होने से उनका तो पूरा परिवार ही उजड़ गया। दहाड़े मारकर रोते हुए यही बोल रहे थे कि अब वह किसके लिए जिएगें। खेतीबाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे।
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भाई-बहन कृष्णा के घर लौटने का कर रहे इंतजार
कृष्णा के पिता वीरसिंह ने बताया कि वह कक्षा आठवीं का छात्र था। बेटे विकास, बेटी मोहिनी व आकांक्षा में घर पर सबका दुलारा था। मौत से मां अनीता रो-रोकर बेहोश हो गई। वहीं भाई-बहन उनसे कृष्णा के घर लौटने के बारे में कई बार पूछ चुके थे। बच्चों को कैसे बताए कि अब कृष्णा कभी घर लौटकर नहीं आएगा। बताया कि वह खेतीबाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते है।
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तीनों हमेशा रहते थे साथ, थी गहरी दोस्ती
ग्रामीणों ने बताया कि हर्ष व आर्यन सगे भाई थे व उनकी मां की मौत हो चुकी है। वहीं कृष्णा, हर्ष के साथ आठवीं कक्षा में पढ़ता था। जिसके चलते अक्सर तीनों साथ-साथ ही रहते थे। साथ खेलना, स्कूल जाना हर जगह वह तीनों अक्सर साथ ही नजर आते थे। तीनों में काफी गहरी दोस्ती थी।
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गांव की गलियों में पसरा सन्नाटा, नहीं पका घरों में खाना
एक साथ गांव के तीन किशोरों की मौत जैसे ही गांव पहुंची, तो घटनास्थल के लिए परिजन समेत ग्रामीणों की भीड़ दौड़ पड़ी। मौत से गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। वहीं गम की वजह से पड़ोसियों के साथ ग्रामीणों के घरों में शाम का चूल्हा नहीं जला। ग्रामीण व रिश्तेदार परिजन को ढाढंस बंधाते नजर आए।