कानपुर देहात। ई-संजीवनी के जरिये उपचार मुहैया करवाने में लापरवाही पर जिले के 58 सीएचओ का वेतन रोक दिया गया। कार्रवाई के बाद से सीएचओ ने ई-संजीवनी के कार्य में तेजी दिखानी शुरू की है। जिससे जिले की रैंकिंग में सुधार हुआ है।
जिले में कुल 219 आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं। इनमें से 55 केंद्रों पर सीएचओ की तैनाती नहीं है। अन्य केंद्रों पर इनकी तैनाती है। ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को मेडिकल कॉलेज या सीएचसी तक की दौड़ न लगानी पड़े। इसके लिए शासन की ओर से ई-संजीवनी सुविधा दी गई है। इसमें ऑनलाइन विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेने की सुविधा दिलाने के सीएचओ को निर्देश हैं।
सीएचओ को प्रतिदिन कम से कम 10 लोगों को ई-संजीवनी से परामर्श दिलाना है। इसके बाद भी जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे थे। बहुत से केंद्रों पर तो सीएचओ महज एक या दो मरीजों को ऑनलाइन परामर्श दिलवा रहे थे। इससे प्रदेश में जिले की रैंकिंग भी गिरती जा रही थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नोडल अफसर व एसीएमओ डॉ. एसएल वर्मा ने बताया कि ई-संजीवनी के कार्य में रुचि न लेने पर 58 सीएचओ का वेतन रोका गया है।
वेतन रोकने की कार्रवाई के बाद से ई-संजीवनी के कार्य में तेजी आई है। दो जून की दैनिक रिपोर्ट में जनपद 10 अंक में 8.9 के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर आया है। शासन के निर्देश अनुसार प्रतिदिन 10 मरीजों को ई-संजीवनी पर परामर्श दिलवाने पर संबंधित सीएचओ का वेतन बहाल कर दिया जाएगा।