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Kanpur News: महाप्रबंधक ने कराया ऑडिट तो खुलती गईं भ्रष्टाचार की परतें, एफआईआर तक नहीं

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कानपुर। बैंक ऑफ इंडिया की दादानगर शाखा समेत अन्य शाखाओं में एक जिला एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) की सब्सिडी में गोलामाल का खुलासा बैंक के महाप्रबंधक की ओर से कराए गए ऑडिट में हुआ है। पहले ऑडिट में कोई गडबड़ी ही नहीं मिली। वित्तीय वर्ष 2021-22 के इन मामलों में करोड़ों का हेरफेर किया गया। अधिकततर मामले कानपुर देहात की इकाइयों के हैं। वहां पर एक जिला एक उत्पाद योजना में प्लास्टिक उत्पाद शामिल हैं। बैंक प्रबंधन के अलावा कानपुर देहात के उद्योग विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बैंक और विभाग के संयुक्त भौतिक सत्यापन के बाद ही मार्जिन मनी यानी सब्सिडी का भुगतान संबंधित इकाइयों को होता है। वहीं, उद्योग विभाग, कानपुर ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। सभी बैंक अफसरों को मार्जिन मनी न भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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बैंक की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया था कि दादानगर की बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में 19 खातों के जरिये करीब 2.20 करोड़ रुपये की सब्सिडी ली गई। इन रुपयों का इस्तेमाल उद्योग लगाने में नहीं किया गया। नियमों को भी ताक पर रख दिया गया। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में बैंक ऑफ इंडिया के कुछ अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से फ्रॉड किया और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में सेंधमारी का रास्ता निकाल लिया।
हैरानी की बात ये है कि बैंक के सालाना ऑडिट में यह मामला वर्ष 2023 में ही पकड़ में आ गया था। यह दूसरी ऑडिट रिपोर्ट थी जिसकी शिकायत तत्कालीन ऑडिटर व बैंक के सीनियर मैनेजर ने की थी। जिसके बाद से इस रिपोर्ट पर तत्कालीन कानपुर के जोनल मैनेजर और उच्च अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए सिर्फ कुछ अधिकारियों का ट्रांसफर कर मामले को दबा दिया। दादानगर शाखा में कार्यरत लगभग सभी अधिकारी अपना तीन वर्ष का निर्धारित कार्यकाल पूरा करने वाले थे। दादानगर शाखा के मैनेजर को कानपुर जोन में निर्धारित समय पूर्ण होने के कारण गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया था। यह मामला सिर्फ दादानगर शाखा तक सीमित नहीं था। दादानगर के मैनेजर ने ही कौशलपुरी, मंधना, सीसामऊ, गुरु तेग बहादुर शाखा के अफसरों को इसी तरह के फ्रॉड में शामिल किया था। सभी शाखाओं ने टारगेट को पूरा करने के लिए और अतिरिक्त लाभ के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
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वित्तीय वर्ष 2021-22 के इन मामलों को वर्षों तक दबाए रखा। जांच में खानापूरी की गई। विजिलेंस जांच के नाम पर कुछ अधिकारियों को आरोप पत्र तक नहीं दिए गए, न ही एफआईआर दर्ज करवाई। बैंक ऑफ इंडिया का जोनल ऑफिस कानपुर के किदवईनगर में है और ओडीओपी योजना के तहत कानपुर देहात के लोन शहर की शाखाओं से कराए गए। बैंक के जोनल ऑफ़िस से ही बड़े लोन स्वीकृत किए जाते हैं। इसके लिए बैंक ने अलग डिपार्टमेंट तक बना रखा है। लोन में की जा रही गड़बड़ी पर बैंक के एक चीफ मैनेजर ने किताब भी लिखी थी। किताब में बैंक के अंदर चल रहे भ्रष्टाचार को उजागर किया था।
कानपुर। बैंक ऑफ इंडिया की दादानगर शाखा में एक ही परिवार या समूह से जुड़े कई प्रतिष्ठानों ने फिक्स डिपाजिट (एफडी) का उपयोग करके बार-बार ओडीओपी का ऋण लेने के साथ ही सब्सिडी हासिल करते रहे। ओडीओपी के बाद पांच करोड़ रुपये के ऋण में 20 लाख रुपये की सब्सिडी का दावा किया गया। जैसे ही सब्सिडी की राशि खाते में आई, उसे तुरंत अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। फिर उसी ऋण की राशि और कुछ अतिरिक्त धन जोड़कर परिवार के दूसरे सदस्य या संबंधित फर्म के नाम से दो करोड़ की नई एफडी बनाकर ऋण, वही ब्याज रियायत और दोबारा 20 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ लिया गया। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रक्रिया कम से कम 11 बार दोहराई गई। जिससे कुल 2.20 करोड़ रुपये की सरकारी सब्सिडी हड़पी गई। अब अन्य शाखाओं समेत 15 से ज्यादा कर्मचारी और अफसर फंस गए हैं।
कोट
मेरी ओर से ही ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए थे। ऑडिट में जो भी गड़बड़ी मिली हैं और जो भी कर्मचारी और अधिकारी जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा। सभी मामलों की जांच शुरू करा दी गई है। -अमरेंद्र कुमार, महाप्रबंधक, बैंक आफ इंडिया।

अधिकतर मामले वित्तीय वर्ष 2021-22 के हैं। जो कानपुर देहात से जुड़ी इकाइयों के हैं। कानपुर स्थित बैंक से जुड़े मामलों की जांच शुरू कर दी गई है। सभी बैंकों को मार्जिन मनी अगले आदेशों तक जारी न करने के निर्देश दिए गए हैं। -अंजनीश प्रताप सिंह, उपायुक्त उद्योग।
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