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Kanpur News: अदालत ने थानाध्यक्ष को तलब किया तो अगले दिन हो गई गिरफ्तारी

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कानपुर। हत्या के मुकदमे में वांछित चल रही महिला अभियुक्त को कोर्ट में पेश न करने पर गुरुवार को अपर जिला जज सप्तम आजाद सिंह ने पनकी थानाध्यक्ष को ही तलब कर लिया। आदेश जारी होने के अगले ही दिन अभियुक्त को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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पनकी थाना क्षेत्र के पतरसा गांव में 28 जनवरी 2024 को शिक्षक दयाराम सोनकर की हत्या हो गई थी। इसमें कथित वकील संजीव कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जो अब भी जेल में ही बंद है। पुलिस ने सिर्फ संजीव के खिलाफ ही चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। एडीजीसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि मुकदमे में दो अन्य अभियुक्तों पवन कुमार व संगीता देवी को तलब करने के लिए कोर्ट में अर्जी दी गई थी। इसमें बताया गया था कि मरने के पहले दयाराम ने भी पवन और संगीता के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर एक मुकदमा लिखाया था। तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने अर्जी मंजूर करते हुए दोनों को तलब कर लिया। जानकारी के बावजूद पवन और संगीता कोर्ट में हाजिर नहीं हुए तो दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। वारंट पर पुलिस हर तारीख पर औपचारिक आख्या भेज दे रही थी। इस पर कोर्ट ने सख्ती बरती और कहा कि अभियुक्तों के अधिवक्ता हर तारीख पर न्यायालय में आकर पैरवी कर रहे हैं, लेकिन पनकी थानाध्यक्ष वारंट का पालन नहीं करा पा रहे हैं। इसलिए आठ अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर जवाब दें। आदेश की जानकारी होते ही आनन-फानन पुलिस टीम ने संगीता के घर की घेराबंदी की और शुक्रवार सुबह उसे गिरफ्तार कर लिया। संगीता को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। हालांकि पवन अब भी फरार चल रहा है।

पत्नी पर प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या का है आरोप

दयाराम के भाई अनुज कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कहा था कि मेरे बड़े भाई दयाराम कानपुर देहात के ग्राम विकास इंटर कॉलेज बुधौली में शिक्षक थे। उनका विवाह वर्ष 2009 में संगीता से हुआ था। वर्ष 2017 में संगीता के अवैध संबंध पवन कुमार से हो गए। पवन के दोस्त संजीव कुमार हैं। संजीव की पहली पत्नी निशा से उसके संबंध खराब चल रहे थे, क्योंकि संजीव ने निशा की सगी बहन मयंक कुमारी को पत्नी बना लिया था। संजीव को शक था कि निशा के संबंध दयाराम से हैं। इस कारण संजीव कुमार, संगीता देवी और पवन कुमार ने दयाराम की हत्या का षडय़ंत्र रचा। 28 जनवरी 2024 को दयाराम को पतरसा बुलाया। देर रात दयाराम ने भाई अनुज को फोन कर बताया कि संजीव ने उसे कमरे में बंद कर आग लगा दी है। मुझे बचा लो। अनुज, अपने ससुर पप्पू उर्फ राजेंद्र सोनकर, चाचा ननका व चचेरे भाई दीपक आदि के साथ जब तक पहुंचा तब तक दयाराम की मौत हो चुकी थी। कमरा बाहर से बंद था और अंदर आग जल रही थी। अनुज ने संजीव, संगीता और पवन तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन पुलिस ने सिर्फ संजीव को पकड़ा और बाकी दोनों को बख्श दिया था।
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अभियोजन ने कुर्की के लिए दी थी अर्जी

एडीजीसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि अभियोजन ने कुर्की का आदेश जारी करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। वहीं, पवन और संगीता की ओर से अधिवक्ता ने तलबी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की बात कही थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई स्थगनादेश जारी नहीं किया था। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित न करने की बात कही थी। हालांकि कुर्की की आदेशिका जारी नहीं की गई थी।
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