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Kanpur: गरीबी बनी पढ़ाई में रोड़ा तो DM ने भरी फीस, जनता दर्शन में पहुंचे दिव्यांग ने बताई थी परेशानी

Fri, 24 Jan 2025 05:10 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: डीएम ने स्कूल प्रबंधक विजय सोनी व प्रधानाचार्य वीरेश से बात की, तो पता चला कि तीन बच्चों की एक साल की फीस 36,100 रुपये है। डीएम ने फीस भरने के लिए प्रबंधक से क्यूआर कोड मंगवाया, तो प्रबंधक ने आधी फीस माफ करने की बात कही।
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पीड़ित परिवार और जिलाधिकारी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में जनता दर्शन में गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह का मानवीय चेहरा देखने को मिला। बेटी संग फरियाद लगाने आए दिव्यांग ने गरीबी का हवाला देकर बच्चों की पढ़ाई बंद होने की बात कही तो जिलाधिकारी ने उनसे स्कूल का नाम पूछा। अफसरों से प्रधानाचार्य-प्रबंधक का नंबर मांग बात की और फीस देने के लिए क्यूआर कोड मंगवाया। इसके बाद तीनों बच्चों की साल भर की फीस जमा कर दी।

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कलक्ट्रेट में जनसुनवाई में घाटमपुर के रहने वाले दिव्यांग बुजुर्ग मुन्ना सिंह शादीशुदा बेटी पूनम के साथ पहुंचे। डीएम ने उन्हें कुर्सी पर बैठाया और प्रार्थना पत्र लेकर समस्या सुनी। उन्होंने बताया कि जमीन की नापजोख के लिए घाटमपुर एसडीएम कार्यालय के कई बार चक्कर काट चुके हैं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। डीएम ने एसडीएम से बात की तो वह कुछ नहीं बता सके।

तीन दिन में समस्या के निस्तारण के आदेश
डीएम ने सख्त लहजे में एसडीएम को तीन दिन में समस्या के निस्तारण के आदेश दिए। इसी बीच पूनम ने डीएम से कहा कि साहब, माता-पिता दोनों दिव्यांग हैं। किसी तरह घर का खर्च चल रहा है। मेरे तीन भाई-बहन कन्हैया लाल, कुंती देवी और शोभित बीआरडी इंटर कॉलेज, मूसानगर में पढ़ रहे हैं। साल भर की फीस जमा न होने से कॉलेज प्रबंधन ने नाम काटने की बात कह रहा है।
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18 हजार रुपये क्यूआर कोड से भेजे
अगर फीस नहीं जमा हुई तो हमारे भाई-बहन की पढ़ाई बंद हो जाएगी। यह सुनते ही डीएम ने स्कूल प्रबंधक विजय सोनी व प्रधानाचार्य वीरेश से बात की तो पता चला कि तीन बच्चों की एक साल की फीस 36,100 रुपये है। डीएम ने फीस भरने के लिए प्रबंधक से क्यूआर कोड मंगवाया तो प्रबंधक ने आधी फीस माफ करने की बात कही। इस पर डीएम ने शेष 18 हजार रुपये क्यूआर कोड से भेज दिए।
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