एमएलडी के नए शोधन प्लांट का इंतजार
2017 में डेढ़ एएमएलडी का सीईटीपी प्लांट शुरू हुआ तो इसकी क्षमता आधी निकली। इसके चलते आज भी प्लांट से पूरे इंडस्ट्रियल वेस्ट का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसलिए अभी रेलवे लाइन किनारे गंदा पानी भरा देखा जा सकता है। नई यूनिट लगाने के लिए तैयार करीब 80 उद्यमियों को यहां प्रस्तावित 4 एमएलडी के नए शोधन प्लांट का इंतजार है। इसके अलावा क्षेत्र की सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। जल निकासी, सीवरेज और पेयजल लाइन अब तक नहीं डाली जा सकी हैं।
खराब स्ट्रीट लाइटों, बिजली कटौती और असुरक्षा से परेशानी
एक बड़ी समस्या खराब स्ट्रीट लाइटों की है। इससे कामगारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उद्यमियों ने बताया कि यहां पांच फीडर हैं। इसमें सबसे अधिक तिरंगा फीडर से एक सप्ताह में करीब 15 घंटे बिजली गुल होती है। इससे उत्पादन प्रभावित होता है। तमाम शिकायतों के बाद भी केस्को अफसर ध्यान नहीं देते। वही पेट्रोलिंग न होने से रात में सुरक्षा बड़ी चुनौती है। रात में यहां ट्रांसफार्मर का तेल तक चोरी हो जाता है। कर्मचारियों से लूट के भी कई मामले आ चुके हैं।
पुलिस पिकेट और पेट्रोलिंग की मांग
उद्यमियों ने कहा कि क्षेत्र में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही यहां पर पुलिस पिकेट भी हो, जिसे बेहतर निगरानी हो सके। ग्रीन बेल्ट को डेवलप कर हरा-भरा किया जाए। ताकि क्षेत्र में आने वाले लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़े।
रूमा औद्योगिक क्षेत्र नगर निगम को हस्तांतरित करने के लिए सर्वे किया जा चुका है। यूपीसीडा को रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है। लेकिन उन्होंने अभी इस क्षेत्र को नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया है। इस वजह से वहां पर अभी दिक्कत है। जल्दी ही इसके लिए रिमाइंडर भेजा जाएगा। -दिवाकर भास्कर, प्रभारी अभियंता, जोन-दो