सरवनखेड़ा। साधन सहकारी समिति सैंथा में डीएपी लेने पहुंचे किसानों ने हंगामा किया। जानकारी पर नायब तहसीलदार पुलिस बल लेकर पहुंचे। इसके बाद प्रति किसान दो बोरी डीएपी का वितरण कराया गया।
गेहूं की बोआई के लिए किसानों को डीएपी की जरूरत है। सैंथा साधन सहकारी समिति में करीब तीन दिन पूर्व 400 बोरी डीएपी की खेप आई थी। रविवार को समिति में खाद का वितरण शुरू कराया गया। इसकी जानकारी मिलने पर भीड़ एकत्र हो गई। कुछ देर डीएपी का वितरण करने के बाद पहले खाद लेने की होड़ में किसान आपस में भिड़ गए। इससे बाद किसानों ने चहेतों को खाद वितरण का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। इस पर समिति अध्यक्ष कुलदीप के कहने पर सचिव ने खाद का वितरण रोक दिया। किसी ने हंगामे व खाद वितरण न होने की जानकारी एसडीएम को दी। उन्होंने नायब तहसीलदार सूर्य प्रकाश को सैंथा भेजा। नायब तहसीलदार, गजनेर थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने हंगामा कर रहे किसानों को शांत कराकर लाइन लगवाई। इसके बाद प्रति किसान दो बोरी खाद का वितरण कराया गया। दोपहर बाद तक 150 किसानों को खाद का वितरण हुआ। नायब तहसीलदार ने बताया कि किसानों को शांत कराकर पुलिस की मदद से लाइन लगवाकर डीएपी का वितरण कराया गया।
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समिति खाली, निजी दुकानों में महंगी मिल रही खाद
रसूलाबाद। कहिंजरी साधन सहकारी समिति में खाद न होने से किसान परेशान हैं। निजी दुकानों पर खाद महंगी है। रबी सीजन में गेहूं की बोआई के लिए डीएपी की मांग है। साधन सहकारी समितियां में भेजी गई खाद ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। अब समिति में खाद का टोटा है तो किसान भटक रहे हैं। समिति में डीएपी का दाम 1350 रुपये प्रति बोरी है। खुले बाजार में डीएपी खाद 1500 रुपये से लेकर 1600 रुपये तक बेची जा रही है। राधेश्याम, रामपाल, मनोज कुमार, श्याम बाबू, अनिल तिवारी, छुनान शुक्ला, मुन्ना अग्निहोत्री, राकेश तिवारी आदि ने बताया कि सहकारी समिति में खाद नहीं है। निजी दुकानों पर महंगी खाद से लागत बढ़ेगी। जिला कृषि अधिकारी उमेश गुप्ता ने बताया कि निजी खाद दुकानों पर नजर रखी जा रही है। रेट बोर्ड पर तय मूल्य लिखना जरूरी है। अधिक दाम पर खाद बेचने वालों पर कार्रवाई होगी। संवाद