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जब 'अटल उद्बोधन' ने झकझोर दिया, ‘बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं, इस जिले से गहरा नाता

Thu, 16 Aug 2018 11:56 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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बालिका इंटर कालेज के उद्घाटन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह व अन्य - फोटो : अमर उजाला
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दिवंगत हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का यूपी के उन्नाव से काफी लगाव रहा। भारतीय जनसंघ के भारतीय जनता पार्टी बनने तक के सफर में कई बार जिले में आए। 1949 में वह जनसंघ के वरिष्ठ नेता थे। तब उन्होने डीएसएन कालेज में कवि सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने अपनी कविता ‘बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं, पांवों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं, निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा’....... सुनाकर सभी को झकझोर दिया था।
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इसके बाद 1973 में वह यहां कमला मैदान में कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। उन्होंने भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ताओं को जनता की आवाज बनने और उनके लिए संघर्ष करने का ऐसा जज्बा भरा कि जिले में जिले की राजनीति में जनसंघ का दौर रहा हो या भाजपा का, पार्टी का कद बढ़ता ही रहा। आज जिले में भगवा परचम लहरा रहा है। सांसद और छह में से पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। 1996 में भांजे की शादी में शामिल होने के लिए कानपुर जाते समय वह नवाबगंज पक्षी विहार में कुछ देर के लिए रुके थे।

 

पूर्व प्रधानमंत्री के निजी सचिव भी थे उन्नाव के

पार्टी प्रत्याशी के चुनाव प्रचार में आए अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
तीसरी बार पूर्व प्रधानमंत्री ने मई 1994 के विधानसभा उप चुनाव में जिले का दौरा किया। उन्होंने भगंवंतनगर विधानसभा से भाजपा के प्रत्याशी रहे कृपाशंकर सिंह के लिए प्रचार किया था।

चौथी बार जुलाई 1997 में वह जिले में आए थे। तब वह पूर्व प्रधानमंत्री थे। उनके साथ तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और सांसद देवी बक्श सिंह भी थे। तब भाजपा के जिलाध्यक्ष आनंद अवस्थी थे। पूर्व प्रधानमंत्री ने अचलगंज में बालिका इंटर कालेज और पड़री खुर्द में पंडित द्वारिका प्रसाद मिश्र डिग्री कालेज की आधारशिला रखी थी। कार्यक्रम के बाद वह कुछ देर के लिए भाजपा नेता चंद्रकांता जोशी के यहां भी रुके थे। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए अपनी सुरक्षा की भी फ्रिक किए बिना सबसे मिले।


पूर्व प्रधानमंत्री के निजी सचिव भी थे उन्नाव के
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्नाव को खासा महत्व मिला। उनकी सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रधामंत्री रहते उनके प्रधान सचिव रहे ब्रजेश मिश्र की जन्मस्थली उन्नाव का पड़री खुर्द गांव था। हालांकि ब्रजेश मिश्र का निधन हो चुका है। लेकिन 1997 में जब अटल जी ब्रजेश मिश्र के पिता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र के नाम पर डिग्री कालेज की आधारशिला रखने आए थे।

 
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इस कैंप में अटल बिहारी वाजपेयी मुख्य शिक्षक थे

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
वर्ष 1975 से 2014 तक राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के जिला संघ चालक रहे रामशंकर त्रिपाठी को जैसे ही पूर्व प्रधानमंत्री की हालत नाजुक होने की जानकारी मिली वह भाव विभोर हो गए। वह लखनऊ और दिल्ली में अपने परिचितों से अटल जी के स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहे। अमर उजाला से बात करते हुए पूर्व जिला संघ चालक ने बताया कि संघ की सेवा करते उन्हें कई बार अटल जी का स्नेह मिला।

वह बताते हैं कि अटल जी की सोच और विचार हमेशा-हमेशा अमर रहेंगे। बताया कि अटल जी पत्रकार व प्रखर वक्ता थे। वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में प्रमुख थे। पूर्व जिला संघ चालक ने बताया कि 1947 में वह भरतपुर संघ की ओटीसी (आफीसर ट्रेनिंग कैंप) में प्रशिक्षण ले रहे थे। इस कैंप में अटल बिहारी वाजपेयी मुख्य शिक्षक थे। उनकी गर्जना भरी आवाज और उद्बोधन मन को झकझोर देने वाला होता था। इसी प्रशिक्षण के दौरान वह अटल जी के संपर्क में आए थे।


1973 में जब अटल जी शहर के कमला मैदान में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में आए थे तो वह दिन में उनके ही घर पर रुके थे। यहीं उन्होंने खाना खाया और प्रमुख लोगों से मुलाकात की। इसके बाद से वह हमेशा अटल जी के संपर्क में रहे।
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