बारिश होगी तो एक ही स्थान पर इकट्ठी हो जाएगी। इसके साथ ही फ्लैश फ्लड की घटनाएं बढ़ेंगी। अचानक किसी स्थान पर बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाएगी। बारिश लगातार थोड़ी-थोड़ी बहुत दिनों तक नहीं चलेगी। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र बदलने, बारिश, गर्मी और जाड़े का समय बदलने का प्रभाव फसलों पर भी आएगा।
जो फसलें बारिश पर आधारित हैं, सबसे अधिक नुकसान उनको होगा। इसके अलावा बीमारियां बढ़ने, वायरस और बैक्टीरिया के म्यूटेशन आदि से रोग बढ़ने लगेंगे। इसका एक ही तरीका है कि पर्यावरण संरक्षण करके तापमान बढ़न से रोका जाए।
तापमान
अधिकतम- 37.8 डिग्री सेल्सियस- 2 डिग्री कम
न्यूनतम- 25.6 डिग्री सेल्सियस- 2.2 डिग्री ज्यादा
उमस बढ़ी, 14 सालों में सबसे गर्म 7 मई की रात
माहौल में नमी बढ़ने से दिन में उमस बढ़ गई है। इससे शहरी परेशान हैं। रात में बादल छाए रहने की वजह से रात का पारा बढ़ गया। न्यूनतम पारा 25.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। सीएसए के मौसम विभाग प्रभारी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि बादल छाए रहने की वजह से दिन की गर्मी माहौल में ही बनी रहती है। इससे रात का पारा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी से नम हवाएं आ रही है। इससे माहौल में नमी बढ़ रही है।