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भारत के खिलाफ अब वेदर वेपन भी तैयार

Wed, 10 Feb 2016 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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भारत पर अब वेदर वेपन (मौसम हथियार) का भी खतरा है। इस पर मंगलवार को विज्ञानियों ने चिंता भी जताई। साथ ही कहा कि पड़ोसी देश युद्धकाल में केमिकल की तरह वेदर वेपन का इस्तेमाल कर सकते हैं। अब इस संकट से निपटने की तैयारी करनी होगी। नई चुनौती जल्द ही सामने आ सकती है।
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शक्तिशाली देश आर्टिफिशियल वेदर बनाकर किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। वेदर वेपन का इस्तेमाल केमिकल वेपन से खतरनाक साबित हो सकता है। डीबीएस, डीजी कॉलेज की ‘इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन फ्यूचरिस्टिक मैटीरियल एंड इमर्जिंग ट्रेंड इन केमिकल’ की तीन दिवसीय केमिस्ट्री की कार्यशाला के दूसरे दिन मंगलवार को कानपुर यूनिवर्सिटी में देश की सुरक्षा, उसकी तकनीक में विज्ञान की भूमिका पर चर्चा की गई।

राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला नई दिल्ली के साइंटिस्ट सुमित कुमार मिश्रा ने कहा कि सेटेलाइट के माध्यम से अभी पड़ोसी देशों की तमाम गतिविधियों पर निगाह रखी जाती है। सूचनाएं भी मिलती हैं लेकिन आर्टिफिशियल वेदर बनाकर सेटेलाइट का रेडिएशन बाधित किया जा सकता है। रेडिएशन के जरिए ही सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। यही नहीं आर्टिफिशियल वेदर से फसल या जनता को भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है। चीन, रूस, अमेरिका सहित तमाम ऐसे देश हैं, जो आर्टिफिशियल वेदर बनाकर कहीं भी बारिश करा सकते हैं।
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बारिश या घने बादल दूसरी जगह शिफ्ट कर सकते हैं। अब भारत को भी इस दिशा में काम करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि मौसम की सटीक भविष्यवाणी की दिशा में राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला नई दिल्ली ने काम शुरू किया है। वहां के विज्ञानियों ने मौसम का वर्तमान डाटा बनाया है, जो सूचना के लिहाज से अच्छा नहीं है। जो नया डाटा आएगा, उसका मिलान करके नया डाटा बनाया जा रहा।

यह प्रयोग सफल रहा तो मौसम से संबंधित भविष्यवाणी और सटीक की जा सकेगी। ऐसा अभी नहीं हो पा रहा। इसी का नतीजा है कि जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश में बारिश से हुई भारी तबाही की भविष्यवाणी पहले से नहीं की जा सकी।
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