कानपुर में भारतीय बालरोग अकादमी और मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के बैनर तले रविवार को ‘नवजात शिशु और कृत्रिम सांस’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि प्री मैच्योर और कमजोर नवजात शिशुओं को फौरन कृत्रिम सांस दिए जाने की जरूरत होती है।
कार्यशाला का आयोजन बालरोग अस्पताल के सभागार में किया गया। पूर्व डीजीएमई प्रोफेसर वीएन त्रिपाठी के अनुसार माताओं के कुपोषण के कारण बच्चे कमजोर पैदा होते हैं। माताओं को आयरन, फोलिक एसिड के साथ सादा और पौष्टिक भोजन दिया जाना चाहिए। इस मौके पर एसजीपीजीआई लखनऊ के प्रोफेसर गिरीश गुप्ता, डॉ. आकाश पंडित ने श्वसन तंत्र प्रणाली और इसकी रचना के संबंध में डॉक्टरों को जानकारी दी।
बालरोग विभागा के अध्यक्ष डॉ. यशवंत राव ने आरटीरियल ब्लड गैस की निगरानी, डॉ. टी वासंथन ने कृत्रिम सांस दिए जाने के लिए वॉल्यूम और प्रेशर के संबंध में बताया। कार्यशाला में 40 डॉक्टरों ने शिरकत की। मुख्य अतिथि प्रोफेसर वीएन त्रिपाठी और मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी रहीं। इस मौके पर डॉ. जेके गुप्ता, डॉ. अंब्रीश, डॉ. माजिद, डॉ. मोहित आदि मौजूद रहे।