घने जंगल के बीच सिर पर तमंचा तना था। बात-बात पर गाली और मारपीट। हमें पता था कि एक भी गलती जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। फिर भी हमने ठान लिया था कि कुछ भी हो यहां से जिंदा वापस जाना है।
यह कहना है लखीमपुर खीरी की उन बहादुर बेटियों का, जिन्होंने 48 घंटे तक अपहर्ताओं के चंगुल में रहकर अपनी सूझबूझ से सकुशल घर वापसी का रास्ता तैयार किया। रविवार को अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के समागम में इन बेटियों को वीरांगना सम्मान दिया गया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इन्हें सम्मानित किया।
ग्राम खेरीगढ़ा निवासी रामबली गुप्ता की बेटियों उपमा (बीएएमएस), रोहिणी (बीकॉम) और संतोषी (11वीं) का 16 जनवरी को घर के अंदर से बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। 18 जनवरी को छूटने के बाद रविवार को कानपुर आईं तीनों बहनों ने ‘अमर उजाला’ को उन 48 घंटों की आपबीती सुनाई।
बोलीं, बदमाशों ने पिताजी को फोनकर 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। कई घंटे के तक रकम नहीं पहुंची तो वे जान से मारने के लिए आमादा हो गए। जिंदगी दांव पर लगी देखकर हिम्मत कर मिन्नतें कीं। उन्हें घर की परिस्थिति बताई और फिरौती की रकम कम करने की मिन्नतें कीं।
इस पर बदमाशों ने 25 लाख रुपये की मांग की। हमें पता चला तो फिर से हिम्मत कर समझाने की कोशिश की। हर बार ये भय लगता था कि छोटी से गलती पर जान जाएगी। एक बार शौच जाने के बहाने भागने की कोशिश भी की लेकिन जंगल में भटक गए। पकड़े जाने पर मार दिए जाने के भय से फिर बदमाशों के ठिकाने लौट गए। आखिरकार वे पांच लाख रुपये पर मान गए।
इतने समय तक हम बहनों ने बदमाशों की एक एक हरकत नोट की ताकि छूटने के बाद उन्हें पुलिस के हवाले करवाया जा सके। यही हुआ भी, हमारी बताई पहचान पर पुलिस ने काम किया और दो बदमाश पकड़े गए। उन्होंने संदेश दिया कि डर के आगे जीत है। बस होश नहीं खोना चाहिए।