जबरन धर्म परिवर्तन करने का मामला सामने आया
आधार कार्ड में मोहम्मद उमर का नाम विवेक पुत्र वीरेंद्र निवासी 47 रायपुर कला चंडीगढ़ दर्ज होने के कारण सेंटर संचालक ने नाम पता बदलने से इन्कार कर दिया। इसकी जानकारी किसी तरह मुजफ्फरनगर के लोहारी खुर्द के प्रधान जैकी राज सैनी को हुई, तो उन्होंने पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद विवेक के परिजनों से संपर्क कर उन्हें मुजफ्फरनगर बुलाया गया। जांच में विवेक का जबरन धर्म परिवर्तन करने और उसे मदरसे में बंद रखने का मामला सामने आया।
प्रधान, मौलवी समेत इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
मदरसे से विवेक को मुक्त कराकर बाल कल्याण समिति की मौजूदगी में उसे पिता वीरेंद्र और मां सरोज को सौंप दिया गया। इसके बाद पूरा परिवार विवेक को लेकर पैतृक गांव बघौली थाना क्षेत्र के गोसवा आ गया। वीरेंद्र कुमार की तहरीर पर मुजफ्फरनगर के चरथावल थाने में नगला राई के प्रधान अफसरून, जामिया उस्मानिया इस्लामिया के मौलवी, मतलूब और मौलाना मुकर्रम जमाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
हरदोई जनपद के बघौली थानाक्षेत्र के गोसवा निवासी वीरेंद्र कुमार की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। धारा- 420 और विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम-1921 की धारा-तीन व पांच के तहत मामला दर्ज किया गया है। किशोर का खतना कर जबरन धर्म परिवर्तन किए जाने का आरोप भी रिपोर्ट में है।
-ओमवीर सिंह, प्रभारी निरीक्षक, चरथावल
आधार कार्ड सेंटर से जानकारी मिली थी। पूरी जानकारी अपने संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी। पुलिस के साथ जाकर बच्चे को मदरसे से निकलवाया। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर किशोर को उसके पिता वीरेंद्र को सौंप दिया गया है।
- जैकीराज सैनी, जिलाध्यक्ष शिवाजी सेना व प्रधान लोहारी खुर्द, मुजफ्फरनगर
जैकीराज और पुलिस की मदद से बेटा साढ़े सात साल बाद मिला है। बेटे को लेकर गांव आ गए हैं। बेटा मदरसा में बंद था। जैकीराज और पुलिस ने उसे सुरक्षित बाहर निकाला। -वीरेंद्र, किशोर का पिता
वेल्डिंग का मिस्त्री बनाकर अरब भेजने की थी तैयारी
मदरसे में साढ़े सात साल से बंधक विवेक को वेल्डिंग का काम सिखा कर सऊदी अरब भेजने की तैयारी थी। इसी के लिए जब आधार कार्ड में नाम, पता संशोधन की बारी आई तो पूरा सच सामने आ गया। फिलहाल विवेक के घर वापस आने से न सिर्फ परिजनों में बल्कि पूरे गांव में खुशी का माहौल है। संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत में विवेक ने बताया कि मदरसे में उसका नाम बदलकर मोहम्मद उमर रख दिया गया।
आधार कार्ड में नाम संशोधन कराने के चक्कर में खुल गई पोल
मदरसे में ही हर समय उसे रखा जाता था। कुछ दिनों के लिए उसे वेल्डिंग का काम सिखाने के लिए फरीदाबाद ले जाया जाता, लेकिन वहां भी मतलूब के करीबी हर वक्त उसके साथ रहते थे। विवेक के मुताबिक, उसे मोहम्मद उमर बनाकर सऊदी अरब भेजने की तैयारी की जा रही थी। इसीलिए आधार कार्ड में नाम संशोधन कराने के दौरान सच सामने आ गया।
दिल कहता था वापस आएगा कलेजे का टुकड़ा
विवेक की मां सरोज से जब बात की गई तो वह खुशी के चलते रो पड़ीं। सरोज ने बताया कि उनके तीन बच्चों में सबसे बड़ी पुत्री सविता, फिर विवेक और अभिषेक हैं। विवेक जब लापता हुआ तो कई माह तक वह चैन से सो भी नहीं पाए, लेकिन उनका दिल कहता था कि कलेजे का टुकड़ा वापस आएगा। सरोज कहती हैं कि साढ़े सात साल बाद सही मायने में वह दिवाली मनाएंगी।
जब विवेक ने पूछा यह कौन...जवाब मिला बहन है
विवेक जब लापता हुआ था, या यूं कहें कि उसका अपहरण हुआ था, तो उससे बड़ी बहन सविता और छोटा भाई अभिषेक ही परिवार में थे। गांव वापस आने पर उसे घर के आंगन में एक बच्ची खेलती मिली, तो विवेक ने पूछा कि यह कौन है। इस पर पिता वीरेंद्र और मां सरोज ने जवाब दिया कि छोटी बहन है। दरअसल विवेक के जाने के बाद मिष्ठी का जन्म हुआ था।
हमारे लिए तो जैकीराज भगवान
विवेक के पिता वीरेंद्र कहते हैं कि मुजफ्फरनगर की लुहारीखुर्द ग्राम पंचायत के प्रधान जैकीराज सैनी भगवान बनकर आए। दरअसल, विवेक को उमर बनाकर रखने की जानकारी आधार सेंटर के संचालक ने सबसे पहले जैकीराज को ही दी थी। जैकीराज मुजफ्फरनगर में शिवाजी सेना के जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने ही पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी और तभी मामला खुला।