इटावा की सदर विधायक सरिता भदौरिया से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिले में सियासी पारा चढ़ गया है। मामले में एक भाजपा कार्यकर्ता की शिकायत पर पुलिस ने चार सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ रंगदारी, मारपीट और एससी-एसटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। इस कार्रवाई के बाद से दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
गाड़ी में बातचीत का वीडियो हुआ था वायरल
दरअसल, बुधवार शाम को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सदर विधायक सरिता भदौरिया गाड़ी में बैठकर कुछ लोगों से निर्माण कार्य को लेकर बातचीत करती नजर आ रही हैं।
भाजपा कार्यकर्ता से मारपीट और रंगदारी का आरोप
उधर, बुधवार देर रात करनपुरा निवासी भाजपा कार्यकर्ता अंकित ने कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि वह सनसिटी गेट के पास से गुजर रहा था। आरोप है कि वहां मौजूद रेशू चौधरी, अंशु चौधरी, अंकित यादव, लकी यादव और 3-4 अज्ञात लोगों ने उसे रोककर जातिसूचक शब्द कहे।
सपा का आरोप— 'काम मांगने गए कार्यकर्ता पर कराया झूठा केस'
सपा के प्रदेश सचिव गोपाल यादव और जिलाध्यक्ष प्रदीप शाक्य ,बबलू यादव ने कहा कि उनका कार्यकर्ता रेशू चौधरी गांव पृथ्वीपुर में भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने और विकास कार्यों की मांग को लेकर विधायक के पास गया था। रेशू का आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर सत्ता के दबाव में पुलिस से उसके खिलाफ झूठी FIR दर्ज कराई गई है।
सदर विधायक बोलीं— 'AI से एडिट किया गया वीडियो'
मामले में सदर विधायक सरिता भदौरिया ने कहा कि उन्होंने किसी के साथ कोई अभद्रता नहीं की है। उनका जो वीडियो वायरल किया जा रहा है, उसे साजिशन एआई (AI) और एडिटिंग के जरिए तैयार करके उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक कार्यकर्ता से रंगदारी मांगने और मारपीट की घटना हुई थी, जिस पर उसने नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराई है।