उज्जैन से लेकर कानपुर तक रास्ते भर विकास दुबे जागता रहा था। पुलिस की दहशत उसकी आंखों और चेहरे पर दिखाई दे रही थी। मगर वह कई बार अपने आप को संतुष्टि देने और पुलिस की आगे की कार्रवाई को भांपने के लिए बोलता रहा कि जेल भेज दोगे तो कुछ महीने या साल में बेल तो मिल ही जाएगी। ऐसे में जानना चाह रहा था कि आखिर पुलिस अधिकारियों के मन में क्या चल रहा है। जेल भेजेंगे या नहीं।
भागने का प्रयास किया
उज्जैन में जब दहशतगर्द विकास को यूपी पुलिस और एसटीएफ को सौंपा गया था तो उसने भागने का प्रयास किया था। हालांकि वह तुरंत दबोच लिया गया था। उसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसको एक दो थप्पड़ भी जड़े थे। दहशतगर्द की इस करतूत से ये अंदाजा लगाया सकता है कि ये कितना बेखौफ था। शायद गिरफ्तारी होने के बाद उसे एनकाउंटर का डर नहीं रह गया था।
कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद उज्जैन पुलिस ने विकास को यूपी पुलिस के हवाले किया। इस दौरान यूपी और एमपी पुलिस के करीब 100 पुलिसकर्मी व अधिकारी मौजूद थे। ऑपरेशन टीम में शामिल एक इंस्पेक्टर के मुताबिक जब विकास को गाड़ी में बैठाया जा रहा था तो अचानक वो हाथ छुड़ाकर भाग पड़ा लेकिन पकड़ लिया गया।
असलहा लूटने की फिराक में था विकास
यूपी पुलिस के हैंडओवर होने के बाद विकास थोड़ा दहशत में था। उसको लग रहा था कि शायद अब उसका एनकाउंटर हो सकता है। जब भागने का प्रयास किया था तो असलहा लूटने की कोशिश भी की थी लेकिन नाकाम रहा था।
एसटीएफ थ्योरी
एनकाउंटर में अहम रोल अदा करने वाली यूपी एसटीएफ की ओर से बताया गया है कि सामने मवेशियों का झुंड आने से कार पलट गई। कार में बैठे पुलिसकर्मी कुछ देर के लिए अचेतावस्था में आ गए लेकिन विकास दुबे को कुछ नहीं हुआ और वह इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी की पिस्टल छीनकर फरार होने लगा। इसके बाद ही उस पर गोली चलाई गई।