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आरोपियों पर ऐसी कार्रवाई होगी कि सात पुश्तें याद रखेंगी: चंद्रिका प्रसाद

Tue, 07 Jul 2020 08:20 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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शहीद सीओ के घर पहुंचे पीडब्लयूडी मंत्री ने परिवार वालों को सौंपा एक करोड़ का प्रमाणपत्र - फोटो : अमर उजाला
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बिकरू गांव मुठभेड़ में शहीद हुए सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा के घर पहुंचे पीडब्लयूडी मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने उनके परिजनों को ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि पुलिस अफसरों और कर्मियों की कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी। कहा कि आरोपियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी कि उनकी सात पुश्तें याद रखेंगी।
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चंद्रिका प्रसाद मंगलवार को शहीद सीओ की पत्नी के खाते में एक दिन पहले सरकार की ओर से भेजे गए एक करोड़ रुपये का प्रमाणपत्र सौंपने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो भी वादे शहीद के परिजनों से किए हैं, वे हर हाल में पूरे किए जाएंगे।

चंद्रिका प्रसाद दोपहर को डीएम डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी, एसएसपी दिनेश कुमार पी, एसपी ट्रैफिक बसंत लाल व सीओ स्वरूपनगर अजीत सिंह चौहान के साथ उनके घर पहुंचे। मंत्री ने उनकी पत्नी आशा व दोनों बेटियों वैशाली और वैशार्र्दी से बातचीत भी की। इस दौरान आशा ने मंत्री से दोनों बेटियों को नौकरी और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
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मंत्री ने उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। साथ ही अपना मोबाइल नंबर देते हुए तेरहवीं के बाद उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री से कराने बात भी कही। वहीं मंत्री से प्रमाणपत्र लेते वक्त वे रोते-रोत बेहोश भी हो गईं। उन्होंने यह भी कहा कि दबिश की सूचना लीक करने वाले पुलिस कर्मी बर्खास्त होंगे, साथ ही जेल भी जाएंगे।
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पूरे प्रदेश के भ्रष्ट पुलिस कर्मी होेंगे बर्खास्त
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस घटना के बाद सभी कप्तानों को पत्र भेजकर प्रदेशभर के ऐसे पुलिस वालों की लिस्ट मांगी है, जिनकी अपराधियों से साठगांठ है। मुख्यमंत्री उन सभी पुलिस कर्मियों को बर्खास्त करने की तैयारी में हैं।

बेटियों को खुशियां बांटने की सीख देते थे.. प्रभु ने मेरी ही खुशियां छीन लीं
मंत्री से प्रमाण पत्र लेते वक्त शहीद सीओ की पत्नी आशा फफक पड़ीं। बोलीं कि मेरे पति हर सोमवार और शनिवार को व्रत रखते थे। बिना पूजा-पाठ किए कहीं नहीं जाते थे। बेटियों को भी जियो, जीने दो और खुशियां बांटों की सीख देते थे लेकिन प्रभु ने उन्हें ही छीन लिया। उन्होंने अपनी नौकरी पूरी ईमानदारी से की। कोई लालच नहीं किया। खुद का घर भी नहीं बना पाए। कहते थे कि सर्विस के कुछ माह बचे हैं। रिटायरमेंट के बाद बच्चों के भविष्य के बारे में सोचेंगे।
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