कानपुर देहात। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने विद्युत सखी बनकर बिजली बिल जमा करने का काम शुरू किया। यह रोजगार का जरिया बना है। अब यह महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर प्रतिमाह 20 से 30 हजार रुपये तक कमा रही हैं।
जिले में तैनात 98 विद्युत सखियों ने बिजली निगम के साथ मिलकर बिजली बिल जमा कर आजीविका शुरू की। बिजली निगम की राजस्व वसूली बढ़ गई। जिला मिशन प्रबंधक निखा सचान ने बताया कि बिजली बिल का संकलन करना चुनौती पूर्ण था, लेकिन आजीविका मिशन की महिलाओं ने इस काम को एक चुनौती के रूप में लिया। प्रशिक्षण के बाद विद्युत सखियों ने बिल जमा करना शुरू किया। महिलाओं ने साबित किया कि वह ठान लें तो कठिन से कठिन काम कर सकती हैं।
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लोग बुलाते हैं बिजली वाली मैडम
शिक्षित होकर भी बेरोजगारी से अपना जीवन बिता रही थीं। जरूरत थी एक अवसर की जो समूह से जुड़कर प्राप्त हुआ। समूह के माध्यम से जुड़कर विद्युत सखी का कार्य किया। इससे अपने सपने को उड़ान दी और अब प्रतिमाह 25 हजार रुपये तक कमा रहीं हूं। गांव में बिजली बिल वसूलने के लिए जाने पर लोग बिजली वाली मैडम कहकर बुलाते हैं। - स्नेहलता, डेरापुर
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मुझे मिली एक अलग पहचान
विद्युत सखी के रूप में काम शुरू करने पर शुरुआत में थोड़ी समस्या हुई। पहले कभी घर की दहलीज से बाहर नहीं निकले थे। धीरे-धीरे लोगों के बीच मेरी अलग पहचान बन गई है। अब लोग बिजली का बिल वसूली करने जाने पर सम्मान देते है। अब बिजली बिल संकलन एवं मीटर रीडिंग से 25 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हूं। - अनीता देवी, डेरापुर
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वर्जन-
शासन से चलाई जा रही योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जा रहा है। जिले में 98 महिलाएं विद्युत सखी बनकर कार्य कर रही हैं। इन्हें अपने गांव व आस पास के क्षेत्र से बिजली के बकाया बिल की वसूली करनी होती है। यह अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। - गंगाराम, उपायुक्त, एनआरएलएम