कानपुर। सोशल मीडिया पर गुरुवार को दो वीडियो वायरल हुए। इनमें जिले के पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी वीरपाल सिंह निजी आईटीआई के कर्मी से रुपये लेते दिखाई दे रहे हैं। एक अन्य वीडियो में वह रुपये लेने से इन्कार कर रहे हैं। एक वीडियो निजी आईटीआई कार्यालय का और दूसरा विकास भवन स्थित पिछड़ा वर्ग कार्यालय का है।
पहले वीडियो में आईटीआई कर्मी मिथलेश त्रिपाठी कागज में लपेटकर 20 हजार रुपये अधिकारी को देते दिख रहा है। वीरपाल सिंह पूरे पैसे देने की बात कहते नजर आते हैं। कर्मी पांच हजार रुपये बाद में भेजने की बात कहता है। अपने स्टाफ उत्तम को बुलाकर पैसे भिजवाने का निर्देश देता है जिसके बाद कर्मी वहां पर मौजूद एक व्यक्ति को रुपये दे देता है वह 20 हजार रुपये लेकर जेब में रख लेता है।
दूसरे वीडियो में कर्मी पिछड़ा वर्ग अधिकारी के कार्यालय में बैठकर 500-500 रुपये के नोट वीरपाल सिंह के हाथ पर रखता है, जिसे अधिकारी मेज की दराज में रखते दिखाई देते हैं। वीडियो वायरल होने के कुछ ही देर बाद निजी आईटीआई कर्मी मिथलेश त्रिपाठी ने एक अपना वीडियो जारी किया। इसमें दावा किया कि बीमारी के दौरान उन्होंने अधिकारी से 25 हजार रुपये उधार लिए थे। उन्हीं पैसों को दो बार में लौटाया है। पहले 20 हजार आईटीआई कार्यालय में और शेष पांच हजार विकास भवन स्थित कार्यालय में। इसी दौरान किसी ने चोरी-छिपे वीडियो बना लिया और उसे गलत तरीके से वायरल किया जा रहा है।
वहीं, पिछड़ा वर्ग अधिकारी वीरपाल सिंह ने भी अपनी सफाई में कहा कि वीडियो पुराने हैं और उन्हें फंसाने के लिए वायरल किया गया है। उनका कहना है कि दो व्यक्तियों ने यह वीडियो उन्हें व्हाट्सएप पर पहले भेजकर ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी। इस संबंध में उन्होंने नवाबगंज थाने में तहरीर दी है।
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सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो संज्ञान में आया है। इसकी जांच के लिए समाज कल्याण उप निदेशक को जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी। - जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी