इसे पुलिस की संवेदनहीनता ही कहेंगे कि एक पीड़ित परिवार न्याय की आस में डीआईजी आफिस के बाहर रात भर बैठा रहा और न तो डीआईजी ने उनकी सुध ली और न ही उनके स्टाफ ने। सुबह जब यह मामला मीडिया ग्रुपों में वायरल हुआ तो मीडिया ने जाकर पीड़ित को डीआईजी से मिलवाया। डीआईजी ने दो दिन में कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पीड़ित परिवार ने न्याय न मिलने पर लखनऊ जाकर सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने की बात कही है।
भोगनीपुर के हरहरा गांव निवासी अधेड़ ने बताया कि वह बगल के हलधरपुर गांव में ईंट-भट्टा में काम करता है। घर पर पत्नी और पांच बेटियां और दो बेटे हैं। 27 फरवरी को जब वह काम करके घर आया तो पता चला कि छोटी बेटी (15) को गांव का ही गिल्ली यादव भगा ले गया। साथ ही घर से 15 हजार रुपये, सोने की बाली और पायल भी ले गया। घटना की रिपोर्ट उसने भोगनीपुर थाने में दर्ज कराई।
जिसके बाद विवेचक दिनेश कुमार यादव कार्रवाई के नाम पर उनको टरकाते रहे। शिकायत लेकर जब वह एसओ, सीओ और एसपी के पास गए तो फिर उसे टरका दिया गया। सोमवार को वह पत्नी, भतीजे और साले के साथ डीआईजी राजेश डी मोडक से मिलने आया। वहां डीआईजी के स्टाफ ने उन्हें साहब न होने की बात कहकर टरकाने की कोशिश की।
जब पीड़ित डीआईजी से मिलने पर अड़ गया तो उन्हें पास वाली मजार पर बैठा दिया गया। इसके बाद पीड़ित सोमवार दोपहर 1 बजे से लेकर रात भर वहीं बैठा रहा। लेकिन किसी ने सुध तक नहीं ली। सुबह 11 बजे तक भी न तो डीआईजी और नही कोई स्टॉफ उनसे मिलने आया। जब मीडिया में बात फैली तो मीडिया ने जाकर उसको डीआईजी से मिलवाया। पुलिस की संवेदनहीनता से परेशान पीड़ित ने न्याय न मिलने पर सीएम योगी से शिकायत करने की बात कही है।