अजय अवस्थी, भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री
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भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस का दावा कर सूबे की सत्ता हासिल करने वाली भाजपा के हरदोई जिला उपाध्यक्ष को विद्युत वितरण खंड द्वितीय अधिशासी अभियंता के कारनामों को उजागर करना महंगा पड़ गया है। जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री ने तीन दिन पूर्व अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर अजय अवस्थी को पदमुक्त कर दिया है। उधर दूसरी ओर अजय अवस्थी ने जिलाध्यक्ष को भेजे गए जवाब में भ्रष्टाचारियों का साथ देने और अनुशासनहीनता करने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। भाजपा जिलाध्यक्ष और जिला उपाध्यक्ष के बीच शुरू तकरार में फौरीतौर पर उपाध्यक्ष को पद गंवाना पड़ा है, पर उपाध्यक्ष ने मामला यहीं खत्म न होने की बात भी कही है।
यह है प्रकरण -
विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता रामसनेही यादव हैं। भाजपा के निर्माणाधीन कार्यालय के सामने से एक विद्युत पोल हटवाने, कार्यालय को विद्युत कनेक्शन देने की प्रक्रिया पूरी की गई थी, पर अभियंता ने एक न सुनी। मामले से संगठन के बड़े पदाधिकारियों को अवगत कराया गया था। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के सह जिला संयोजक सतेंद्र मिश्र ने यादव की शिकायत डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से की। इस शिकायत पर कवरिंग लेटर के तौर पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष अजय अवस्थी और मीडिया प्रभारी गांगेश पाठक के पैड भी लगे हुए थे।
इसके बाद शासन ने उनका तबादला पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम बनारस में कर दिया। चूंकि यादव की शिकायतें डिप्टी सीएम से मीडिया के सामने ही हुई थीं और जब कार्रवाई हुई तो हटाने को भाजपा नेता की शिकायतों से जोड़कर सोशल मीडिया और मीडिया में खबरें प्रकाशित हुईं। यह बात भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री को नागवार गुजरी। उन्होंने मीडिया में आई खबरों को संज्ञान में लेते हुए जिला उपाध्यक्ष अजय अवस्थी और मीडिया प्रभारी गांगेश पाठक को नोटिस जारी कर दी। नोटिस में अभियंता के कारनामों का खुलासा करने को अनुशासनहीनता की संज्ञा देते हुए 12 मई तक जवाब देने को कहा गया।
सोमवार शाम पदमुक्त हो गए अजय-
सोमवार शाम जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण शास्त्री ने मीडिया को पत्र जारी किया। पत्र में जिलाध्यक्ष ने कहा कि 12 मई को अवस्थी का नोटिस के जवाब में भेजा गया उत्तर मिला। श्रीकृष्ण का कहना है कि अवस्थी ने प्रश्नगत विषय का संगत उत्तर देने या खेद प्रकट करने की जगह नेतृत्व पर आक्षेप लगा सोशल मीडिया पर वायरल किया। कहा गया है कि इस आचरण से सिद्ध होता है कि अजय अवस्थी को संगठन की रीति-नीति और अनुशासन से कोई सरोकार नहीं है। इसलिए जिला उपाध्यक्ष के पद से मुक्त किया जाता है।