कानपुर। दिसंबर से शुरू हो रहे ज्योतिषीय परिवर्तन इस वर्ष विवाह समारोहों पर विशेष प्रभाव डालेंगे। 11 दिसंबर से शुक्र तारा अस्त होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु या शुक्र में से किसी एक के भी अस्त होने पर विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। ऐसे में छह दिसंबर तक ही वर्ष का अंतिम शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध था।
ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक व अध्यक्ष आचार्य पवन तिवारी के अनुसार, पांच दिसंबर से पौष मास लग चुका है और इसके बाद 16 दिसंबर से खरमास की शुरुआत होगी। खरमास और शुक्रास्त दोनों के एक साथ प्रभावी रहने के कारण विवाह और मांगलिक कार्यों पर लगभग डेढ़ महीने का विराम लग जाएगा। शुक्र 11 दिसंबर 2025 से 53 दिन तक अस्त रहेंगे और एक फरवरी 2026 को उदित होंगे। इसी दिन से मांगलिक कार्यों की शुभ शुरुआत मानी जाएगी। ज्योतिष में शुक्र को वैवाहिक सुख, प्रेम, धन-संपत्ति, वैभव और ऐश्वर्य का कारक ग्रह बताए गए हैं। 15 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा किंतु शुक्र उदित न होने के कारण विवाह मुहूर्त एक फरवरी 2026 से ही शुरू होंगे।
ज्योतिषाचार्य दीपक पांडे के अनुसार इन तीन राशियों पर अधिक प्रभाव
वृष राशि – शुक्र के अस्त होने से नौकरी व व्यवसाय में सफलता के संकेत। बड़े प्रोजेक्ट से लाभ संभव।
तुला राशि – आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ऋण से मुक्ति या लोन संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती।
मकर राशि – प्रेम जीवन में प्रगति और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक सुधार के संकेत।