उर्सला हॉस्पिटल के आईसीयू में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से वेंटिलेटर ठप हुए हैं। वेंटिलेटर न मिलने से दो मरीजों की जान जा चुकी है। आईसीयू में लगे छह वेंटिलेटर की मरम्मत के लिए कभी शासन को प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया। शासन ने साइरिक्स कंपनी को अस्पतालों के उपकरण खराब होने पर मरम्मत की जिम्मेदारी दे रखी है। जब सारे वेंटिलेटर ठप हो गए तो दो वेंटिलेटर को कंपनी को मरम्मत के लिए दिया गया है। अस्पताल अगर पहले यह व्यवस्था करता तो यह स्थिति ही न आती। अस्पताल प्रबंधन और कंपनी के बीच तालमेल नहीं रहा।
शनिवार को अधिकारियों ने आईसीयू की स्थिति देखी। उर्सला आईसीयू में छह वेंटिलेटर लगे हैं। ये अलग-अलग कंपनियों के हैं। इनकी मरम्मत की जिम्मेदारी साइरिक्स कंपनी की है। अधिकारियों का कहना है कि वेंटिलेटर जिस कंपनी का होता है, उसे उसी कंपनी के पास मरम्मत के लिए भेजा जाता है। वेंटिलेटर जब तक चलता रहता है तो कंपनी जल्दी से रिपेयर के लिए राजी हो जाती है, बंद हो जाने पर ना-नुकुर करती है।
आईसीयू के मामले में भी यही हुआ। जब तक वेंटिलेटर चलते रहे, अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। जब बंद हो गए तो कंपनी वाले नखरे दिखाने लगे और एक के बाद दूसरा वेंटिलेटर खराब होता गया। स्थिति बिगड़ने पर साइरिक्स कंपनी वाले दो कंप्यूटर मरम्मत के लिए ले गए हैं और बाकी कबाड़ की स्थिति में स्टोर में रखे हैं।