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वीर चक्र प्राप्त हवलदार उदयराज सिंह का निधन, 1971 में बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान से लड़े थे

Thu, 09 Jan 2020 11:24 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
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वीर चक्र प्राप्त हवलदार उदयराज सिंह का निधन - फोटो : अमर उजाला
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1971 में बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में वीरचक्र प्राप्त उन्नाव निवासी हवलदार उदयराज सिंह का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह काफी समय से हृदय रोग समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित थे। गुरुवार दोपहर 2.30 बजे उन्होंने कानपुर के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। शुक्रवार को बक्सर घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। 
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बैसवारा के रामसिंहखेड़ा निवासी उदयराज सिंह वर्ष 1971 में हुए बांग्लादेश युद्ध में यशपुरा पल्टन में हवलदार पद पर तैनात थे। अवकाश लेकर घर आए थे। छुट्टियां पूरी भी नहीं हुई थी कि सेना से टेलीग्राम मिला। अवकाश समाप्ति के 10 दिन पहले ही वह ड्यूटी के लिए निकल गए। मोर्चे के लिए कूच कर चुकी अपनी पलटन में वे अगरतला में शामिल हुए।

 

तीन दिन तक कई कठिनाई और खतरों को पार कर जब वे फ ीचूगंज पहुंचे तो यहां पर नदी को रेलवे पुल के रास्ते पार करना था। दोनों ओर से हो रही भीषण गोलीबारी के बीच रेंगते हुए उनके नेतृत्व में सेना की टुकड़ी ने पुल पार कर दुश्मनों पर जोरदार हमला किया था। उन्होंने दुश्मन की लाशें बिछाते हुए उन्हें भागने के लिए विवश कर दिया था। साथ ही मौके से ही 11 पाकिस्तानी सैनिकों को जीवित हिरासत में भी लिया था।

उनके पराक्रम और बुद्धिमत्ता के कारण तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि ने उन्हें वीरचक्र सम्मान से सम्मानित किया था। उदयराज सिंह के करीबी रहे सेवानिवृत कैप्टन योगेंद्र बहादुर सिंह के मुताबिक, वर्ष 1984 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी निभाते रहे।

 
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इस दौरान उनका बड़ा पुत्र अरुण सिंह एक दुर्घटना में घायल होने के बाद सेना से आउट कर दिया गया तथा छोटे बेटे केशन कुमार की आकस्मिक मृत्यु हो गई थी। हालांकि उन्होंने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को मदद करने के इरादे से इसी दौरान अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक संगठन की नींव डाली थी जो आज भी सेना की तरह ही अनुशासित रहकर संचालित हो रहा है। 

आठ साल की उम्र में ही उठ गया था मां-बाप का साया
हवलदार उदयराज सिंह जब 8 साल के थे तभी पिता जालिम सिंह व माता राधा सिंह का निधन महज छह माह के अंतराल में ही हो गया था। बाबा, दादी व चाचा के संरक्षण में पले उदयराज सिंह उन्नाव में भर्ती प्रारंभ होने की जानकारी मिलने के बाद वह शामिल होने गए थे। उन्हें सेना में शामिल कर लिया गया था। माता-पिता के निधन के बाद छोटे भाई उदय प्रताप सिंह और उदयभान सिंह की भी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। परिवार में पत्नी चंदा सिंह के अलावा बेटे अरुण सिंह और छोटे बेटे की पत्नी व उसके दो बेटे, दो बेटियों का परिवार है।
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