इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में बताया गया कि बिना ओपन हार्ट सर्जरी किए वाल्व बदलने की तकनीक आ गई है। एंजियोप्लास्टी की तरह जांघ के ऊपर के स्थान पर छेद करके तार डालकर इसे किया जाता है।
गैर सर्जिकल होने के कारण यह अधिक सुरक्षित है। कार्डियो थोरोसिस एंड वैस्कुलर सर्जकी ओपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विजयंत देवनराज ने बताया कि उनकी टीम ने अभी हाल में पहली बार तीन रोगियों का इस विधि से वाल्व बदला है।