बहुत से रोगियों के तीमारदार उर्सला में एमआरआई कराने के बाद निजी डॉक्टर को पैसे देकर रिपोर्ट बनवाते हैं। उनका कहना है कि एक सप्ताह में रोगी की तबीयत और बिगड़ सकती या उनकी जान भी जा सकती है। उधर, डॉक्टरों का कहना है कि पांच माह पहले निदेशक रहे डॉ. आरसी भट्ट रेडियोलॉजिस्ट थे। वही एमआरआई रिपोर्ट बना देते थे। उनके तबादले के बाद से यहां रिपोर्ट बनाने का काम बंद है।
डॉक्टर बीमार, सिर्फ बड़े मामलों की रिपोर्ट
उर्सला में दो अल्ट्रासाउंड मशीन लगी हैं और एक्सरे जांच भी होती है। ओपीडी पूरी क्षमता के साथ चलती है तो करीब डेढ़ हजार जांचें प्रतिदिन होती हैं। मेडिसिन वगैरह की ओपीडी बंद होेने से इसकी 40 फीसदी के आसपास ही जांचें हो रही हैं। सर्जिकल ओपीडी से लोग आ रहे हैं। यहां पर तैनात स्थायी रेडियोलॉजिस्ट को 15 दिन पहले हार्टअटैक पड़ा था। तबसे वह अवकाश पर हैं।
इसके बाद रिपोर्ट भी नहीं बन पा रही है। इससे इमरजेंसी में आने वाले चेस्ट के रोगियों और सर्जिकल रोगियों को दिक्कत हो रही है। संविदा पर तैनात डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कर लेते हैं। लेकिन, मेडिको लीगल मामलों में उनकी रिपोर्ट मान्य नहीं होती। बड़े मसलों में किसी तरह काम चलाने के लिए कांशीराम अस्पताल से एक घंटे के लिए रेडियोलॉजिस्ट बुलाया जाता है। बाकी मामले पेंडिंग में पड़े रहते हैं। मंडल के दूसरे जिलों से आने वाले लोगों को बहुत दिक्कत होती है।
अस्पताल के एकमात्र स्थायी रेडियोलॉजिस्ट बीमार हो गए हैं। इससे मेडिको लीगल समेत अन्य रोगियों की जांच में भी दिक्कत हो रही है। एमआरआई जांच की रिपोर्ट को लेकर भी यही परेशानी है। शासन से एक स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग की गई है।
डॉ. अनिल निगम, सीएमएस, उर्सला अस्पताल