उप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) में तैनात सहायक प्रबंधक (सामान्य) को नियुक्ति के दौरान फर्जी खेल प्रमाण पत्र दाखिल करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।
मामला यह है कि सामान्य / बैकलाग / सीधी भर्ती के लिए वर्ष 2009-10 के लिए निगम में श्रेणी ग के तहत एक पद सामान्य, एक पद पिछड़ा वर्ग और एक पद अनुसूचित जाति के लिए आवेदन मांगे गए थे।
शर्मिला पटेल ने शैक्षिक योग्यता व प्रदेशीय क्रीड़ा प्रतियोगिता, फैजाबाद के प्रमाण पत्र 2004-05 के साथ कुल 17 दस्तावेज लगाए थे।
इसके बाद 13 अगस्त 2009 को शर्मिला पटेल ने एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि की शर्त के साथ कार्यभार ग्रहण किया। शर्मिला पटेल को चयन के दौरान खेल प्रमाण पत्र के आधार पर तीन अंक दिए गए थे।
इसके बाद 17 अगस्त 2010 को शर्मिला पटेल को स्थाई किया गया।
वर्ष 2008-09 और वर्ष 2009-10 में सामान्य / बैकलाग के रिक्त पदों को पूरा करने के लिए विशेष भर्ती अभियान के तहत निगम में की गई नियुक्तियों में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, लखनऊ को अनियमितताओं की शिकायत मिली।
इस पर उन्होंने आयुक्त, कानपुर मंडल को अभिलेखों का शैक्षिक संस्थाओं से सत्यापित कराकर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
जांच करने पर राजकीय इंटर कालेज, फैजाबाद की प्रधानाचार्य ने शर्मिला पटेल के प्रमाण पत्र की छायाप्रति को देखने के बाद बताया कि ये प्रमाण पत्र बिना क्रमांक का है।
इसके साथ ही राजकीय इंटर कालेज माध्यमिक विद्यालय है, यहां पर केवल इंटरमीडिएट स्तर तक के छात्र-छात्राओं की प्रतियोगिता होती है जबकि अभ्यर्थी का संबंध परास्नातक से है।
इसके साथ सत्र 2004-05 में कार्यरत प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर भी छायाप्रति में अंकित हस्ताक्षर से पूरी तरह भिन्न हैं। इसके अलावा सत्र 2004-05 में हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन राजकीय इंटर कालेज द्वारा नहीं किया गया था।
इस प्रकार शर्मिला पटेल के खेल प्रमाण पत्र की छायाप्रति पूरी तरह से अवैध है।
यूपीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक मनोज सिंह ने बताया कि शर्मिला पटेल ने फर्जी खेल प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की थी। इनकी नियुक्ति कानून के हिसाब से प्रारम्भत: शून्य है।
अत: सहायक प्रबंधक (सामान्य) को तत्काल प्रभाव से निगम की सेवा से हटा दिया गया है।