फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी का धन कुबेर: 60 सेकंड में गाड़ियों की फिटनेस, हर लाइसेंस पर 500 की घूस; ऐसे खड़ी की 35 करोड़ की संपत्ति

सार

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग का एक ऐसा 'धन कुबेर' सामने आया है, जिसने रिश्वतखोरी के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। 35 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति बरामदगी के मामले में घिरे सेवानिवृत्त एआरटीओ ललित कुमार का काला चिट्ठा अब खुलकर सामने आ गया है।
विज्ञापन
यूपी का धन कुबेर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कानपुर के गांधीनगर इलाके की सामाजिक संस्था ने इस महाभ्रष्टाचार की परतों को खोलते हुए चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसने सरकारी सिस्टम की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। संस्था के पदाधिकारियों ने सेवानिवृत्त एआरटीओ ललित कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए केंद्रीय सतर्कता आयोग और परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

विज्ञापन

संस्था के प्रदेश अध्यक्ष नीरज श्रीवास्तव, महामंत्री शैलेंद्र कुमार और कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता ने सितंबर 2020 में 'घूस को घूसा' अभियान के तहत इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया था। आरोप है कि ललित कुमार ने साल 2016 से 2019 के बीच कानपुर आरटीओ में संभागीय निरीक्षक के पद पर रहते हुए हर महीने करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। इसके बाद साल 2019 में हुए उनके प्रमोशन पर भी संस्था ने कड़ी आपत्ति जताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

बिना ट्रायल 500 रुपये में पास होता था स्थायी लाइसेंस

संस्था की ओर से की गई शिकायत के मुताबिक, कोरोना काल से पहले आरटीओ में नए स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का एक तय रेट कार्ड चलता था। उस दौरान हर दिन करीब 300 आवेदकों का स्लॉट बुक होता था। हैरानी की बात यह है कि इन 300 लोगों में से केवल 10 से 15 फीसदी लोग ही मैदान पर आकर गाड़ी चलाने का वास्तविक ट्रायल देते थे।

बाकी बचे 85 से 90 फीसदी आवेदकों को बिना किसी टेस्ट और नियमों को ताक पर रखकर, प्रति लाइसेंस 500 रुपये की सीधी रिश्वत लेकर 'पास' कर दिया जाता था। यही खेल धड़ल्ले से लर्निंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर भी खेला जा रहा था।

60 मिनट में 100 वाहनों की जांच

इस धन कुबेर की चालाकी और लापरवाही का सबसे बड़ा खेल वाहन फिटनेस के नाम पर खेला गया। संस्था के पदाधिकारियों ने दस्तावेजों के साथ आरोप लगाया है कि फिटनेस पॉइंट पर गाड़ियों की तकनीकी जांच के नाम पर महज खानापूर्ति होती थी। आरटीओ दफ्तर में सिर्फ 60 मिनट के भीतर 100 से अधिक वाहनों की जांच पूरी कर ली जाती थी।

गणित के हिसाब से देखें तो एक वाहन की फिटनेस जांचने में 60 सेकेंड से भी कम का समय लिया जाता था। इतना ही नहीं, दलालों के सिंडिकेट के जरिए जो गाड़ियां शहर से बाहर होती थीं या आरटीओ दफ्तर तक नहीं आ पाती थीं, मोटी घूस लेकर उनका भी घर बैठे फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता था।

अकूत संपत्ति देख जांच एजेंसियां भी हैरान

महज 500-500 रुपये की फुटकर रिश्वत और फिटनेस के नाम पर लाखों के इस खेल ने ललित कुमार को यूपी परिवहन विभाग का सबसे बड़ा 'धन कुबेर' बना दिया। जांच एजेंसियों द्वारा अब तक की गई कार्रवाई में उनके पास से 35 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति और दस्तावेज बरामद हो चुके हैं।

विज्ञापन

इस खुलासे के बाद अब विजिलेंस और भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीमें ललित कुमार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए सभी लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट्स के रिकॉर्ड खंगालने में जुट गई हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें