कानपुर के किदवई नगर और नौबस्ता से 10 साल पहले गिरफ्तार किए गए माओवादी संगठन से जुड़े होने के तीन अभियुक्तों के सोमवार को विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट पवन कुमार श्रीवास्तव की अदालत में बयान दर्ज किए गए। लखनऊ से आए एटीएस के संयुक्त निदेशक अभियोजन अतुल ओझा भी कोर्ट में मौजूद रहे।
मामले की अगली सुनवाई छह मार्च को होगी। वर्ष 2010 में गोरखपुर में हीरामणि उर्फ आशा देवी की गिरफ्तारी हुई थी। उससे जानकारी हुई कि कानपुर में माओवादी संगठन से जुड़े लोग देश में विद्रोह फैलाने के लिए बड़ी बैठक करने वाले हैं। एसटीएफ लखनऊ और कानपुर की संयुक्त टीम ने आठ फरवरी 2010 को यू ब्लॉक निराला नगर से उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी शिवराज सिंह बगदावल व राजेंद्र उर्फ अरविंद, देवरिया के कुशीनगर निवासी कृपाशंकर को गिरफ्तार किया था।
उसी दिन नौबस्ता के हमीरपुर रोड स्थित मकान से भी बच्चा प्रसाद उर्फ बलराज उर्फ बीआर उर्फ अरविंद, बंशी प्रसाद उर्फ चिंतन, नवीन प्रसाद सिंह, अमरीश उर्फ राजेंद्र दास व दीपक राम को भी गिरफ्तार किया गया था। अधिवक्ता मो. आसिफ खान ने बताया कि सभी आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। दो आरोपियों चिंतन और दीपक राम की मौत हो चुकी है।
दोनों मामलों में अभियोजन की ओर से 15-15 गवाह पेश किए गए। इनमें मुख्य रूप से तत्कालीन गृहसचिव आनंद कुमार जिन्होंने मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी गोविंद नगर जो बाद में आगरा के एसपी बन गए थे और विवेचनाधिकारी एएसपी राजेश श्रीवास्तव के बयान मुख्य थे। सोमवार को शिवराज, राजेंद्र और कृपाशंकर के बयान भी दर्ज किए गए।