उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को तमाम संकटों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, भाजपा की टिकटों की घोषणा के बाद से प्रदेशभर में सीटों पर भयंकर खींचतान जारी है।
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आदित्यनाथ के तेवर हुए थी बागी
योगी आदित्यनाथ
एक समय यह खबर भी सामने आई थी कि भाजपा के गोरखपुर से सांसद और पूर्वी यूपी के दिग्गज नेता योगी आदित्यनाथ के तेवर बागी हो गए हैं।केवल यही नहीं योगी की हिन्दू युवा वाहिनी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में 64 सीटों से चुनाव लड़ने की घोषणा की है, ऐसी खबरें भी थी। लेकिन बाद में यह मामला हवा हो गया।
भाजपा के ऊपर छाए संकट के बादल अब इत्र नगरी कहे जाने वाले कन्नौज क्षेत्र पर मंडराने लगे हैं। कमल खिलाने के लिए भाजपा ने यहां अपनी पूरी ताकत झौंक रखी है। अपने खोए हुए वोटवैंक को हासिल करने के लिए भाजपा ने अपने स्टार प्रचारकों को लगा दिया है।
इस सीट पर सपा का जलवा
डिंपल यादव (फाइल फोटो)
लेकिन सामने अन्य पार्टियां भी हैं। कन्नौज सीट पर सपा का जलवा रहा है। अखिलेश की धर्मपत्नी डिंपल यादव इसी सीट से सांसद हैं। जाहिर है सपा की जनाधार यहां भाजपा से मजबूत है। ऐसे में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती होगी कि वह सदर व तिर्वा में अपने गिरते जनाधार को किसी तरह बचा ले जाए।
गिरते वोटबैंक में सुधार अवश्य
नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह (फाइल फोटो)
छिबरामऊ विधानसभा में गिरते वोटबैंक में सुधार अवश्य
भाजपा को जीत हासिल करने के लिए इन विधानसभा में अपने खोए हुए वोटबैंक में दोबारा हासिल करना होगा। कन्नौज जिले की विधानसभाओं में सदर विधानसभा में भाजपा ने आखिरी जीत का स्वाद 1996 में बनवारी लाल दोहरे के रूप में चखा था।
छिबरामऊ में 2002 में राम प्रकाश त्रिपाठी ने भाजपा को अंतिम जीत दिलाई
छिबरामऊ में 2002 में राम प्रकाश त्रिपाठी ने भाजपा को अंतिम जीत दिलाई थी। वहीं, तिर्वा में 1996 में कैलाश राजपूत को जीत हासिल हुई थी। कन्नौज व तिर्वा में जीत के बाद से भाजपा का वोट बैंक लगातार गिरता चला गया। वहीं, छिबरामऊ में 2012 के चुनाव में भाजपा के वोटबैंक में 3 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी।
इस चुनाव में अपना खोया सम्मान वापस पाने में जुटी भाजपा
डेमो
इस चुनाव में अपना खोया सम्मान वापस पाने में जुटी भाजपा
भाजपा ने सदर में अपने को साबित करने के लिए बनवारीलाल को एक और मौका दिया है वहीं तिर्वा में कैलाश राजपूत के पास अपना खोया वोटबैंक बटोरने का मौका है। छिबरामऊ विधानसभा में भाजपा का ग्राफ बढ़ाने वाली अर्चना पांडेय पर भाजपा ने कमल खिलाने की जिम्मेदारी सौंपी है। सभी की निगाहें भाजपा के इन तीनों धुरंधरों पर लगी हैं कि वह 2017 में कन्नौज में कमल खिला पाने में किस हद तक कामयाब होते हैं।