ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी अमेजन को तीन करोड़ का चूना लगाने वाले गैंग के तार जालौन कालपी तक फैले हुए हैं। पूर्व में अमेजन के वेयर हाउस के सपोर्ट एसोसिएट, जीएनआरएल कंपनी के तीन डिलीवरी ब्वॉय व एसआरसीबी कंपनी के सुपरवाइजर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने गैंग के जालौन निवासी पांच अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने उनके पास से अमेजन की आंख में धूल झोंककर कमाए गए सात लाख के विभिन्न कंपनियों के इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद किए हैं। गुरुवार को एसपी साउथ दीपक भूकर ने प्रेसवार्ता में खुलासा करते हुए पांचों को जेल भेज दिया। दादानगर स्थित अमेजन कंपनी के वेयर हाउस से शहर के साथ ही आसपास के जिलों में भी माल की सप्लाई की जाती है।
करीब एक साल से इस वेयर हाउस से फर्जी माल मिलने की बहुत शिकायतें दर्ज हुईं, जिस पर कंपनी ने माल वापस कर ग्राहकों के खातों में पैसे लौटा दिए। करीब तीन करोड़ की चोट खाने के बाद कंपनी ने जब जांच पड़ताल की तो पता चला कि कुछ गिनेचुने ग्राहक ही बार-बार इलेक्ट्रानिक उपकरण जैसे पंखे, मिक्सर, आईफोन, रूम हीटर, ब्लोअर, स्पीकर, जूसर आदि ऑर्डर कर रहे हैं और गलत माल आने की शिकायत करके रिफंड ले रहे हैं।
इस पर कंपनी के प्रतिनिधि ने एसपी साउथ दीपक भूकर से मामले की शिकायत की। पुलिस ने पहले कंपनी के वेंडर विश्वबैंक निवासी उदय कुमार, नौबस्ता निवासी अमित पटेल, बर्रा सात निवासी प्रदीप सिंह, सिविल लाइंस निवासी जितेंद्र सिंह, महादेव नगर कच्ची बस्ती निवासी विकास कुमार को गिरफ्तार किया था। उनकी सीडीआर खंगाली तो पता चला कि कालपी गनेरागंज में रहने वाले अमेजन के रजिस्टर्ड डीलर मंजीत गुप्ता भी इस गैंग में शामिल हैं।
मंजीत की शहर के वेयर हाउस एसोसिएट से सांठगांठ थी। कंपनी से ठगी के बाद बचने वाले माल को मंजीत कूड़े के भाव खरीद कर उसे कालपी में साथी अन्य इलेक्ट्रानिक दुकानदारों को बाजार से सस्ते दामों पर बेच देता था। अपना गैंग भी तैयार कर रखा था।
पुलिस ने गैंग में शामिल कागजीपुरा जालौन निवासी प्रदीप गुप्ता, कालपी इंदिरानगर निवासी अनुराग विश्नोई, कालपी रांवगंज निवासी कपिल सिंह व कालपी मिर्जामंडी निवासी राहुल कोष्टा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मंजीत कंपनी को पिछले तीन सालों से चूना लगा रहा था। 2019 में लखनऊ में भी इस तरह का मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें मंजीत का नाम प्रकाश में आया था, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में वह बच निकला था।
इस तरह लगाते थे चूना
फर्जी आईडी के सिम से ऑर्डर बुक कराया जाता था। डिलीवरी करने के कुछ ही देर में असली माल बॉक्स से निकाल कर उसमें कबाड़ या पुराने उपकरण रख कर रिफंड के लिए कंपलेन बुक करा दी जाती थी। माल लेने पहुंचने वाले भी गैंग से मिले रहते थे, जो बिना जांच पड़ताल माल वापस कर लेते थे। इसके बाद गैंग के पास पैसे के साथ ही माल भी आ जाता था। इसको बाजार में बेचने के बाद पैसों को आपस में बांट लिया जाता था। कंपनी से बातचीत के लिए कई फर्जी नामों से मेल आईडी तक तैयार की गई थीं।