फर्रुखाबाद पुलिस, सीबीआई व अन्य सुरक्षा व जांच एजेंसियों के लिए बाबा वीरेंद्र देव एक अबूझ पहेली बन चुका है। 20 साल से उसका पता नहीं चला है। यहां तक कि सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी के पास उसकी कोई नई तस्वीर तक नही हैं। किसी को यह तक नहीं पता है कि बाबा वीरेंद्र देव अब दुनिया के किस कोने में है और कैसा दिखता है।
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आश्रमों से सैकड़ों लड़कियों को आजाद करा चुकी है पुलिस
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बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित से जुड़े आश्रमों में चल रही है पुलिस की छापेमारी (फाइल फोटो)
फर्रुखाबाद जनपद के कंपिल कसबा निवासी बाबा वीरेंद्र देव को 1998 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद वह जमानत पर बाहर आया तो दोबारा पुलिस के हाथ नहीं लगा। देश के हर कोने में उसका नेटवर्क, आश्रम और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय खुले हैं। बाबा पर दिल्ली, मुंबई, जम्मू समेत कई शहरों में गंभीर मामले दर्ज हैं।
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वीरेंद्र देव की तलाश में कंपिल आश्रम पहुंची थी सीबीआई
कई मामलों में जांच सीबीआई के पास है। लेकिन, 1998 के बाद से किसी को बाबा के विषय में कुछ पता नहीं चला। यहां तक कि सीबीआई ने दो सालों में कंपिल स्थित आश्रम पर कई बार छापे मारे और पूछताछ की। बुधवार को सीबीआई ने बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाबा की पहचान कैसे होगी। सीबीआई हो या पुलिस या कोई अन्य जांच एजेंसी किसी के पास बाबा की कोई लेटेस्ट या दो से तीन साल पुरानी तस्वीर तक नहीं हैं। पुलिस रिकॉर्ड में 1998 में ली गई बाबा की तस्वीर ही नजर आती है। 20 साल से गायब बाबा को पकड़वाने में उसके सेवादार ही जरिया बन सकते हैं।
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित का आध्यात्मिक विश्वविद्यालय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन बाबा के सेवादार कुछ बोलने को तैयार नहीं होते हैं। अब तक पुलिस व सीबीआई की टीमें बाबा के विभिन्न आश्रमों से सैकड़ों लड़कियों को आजाद करा चुके हैं। लेकिन कोई भी अब तक कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ। ना ही कोई बाबा की पहचान बता सका है।