कश्मीर घाट के सर्च ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सेना की गोली का शिकार हुए जिले के लाल पंकज दुबे ने सात दिन बाद दम तोड़ दिया। पंकज के शहीद होने की सूचना लगते ही परिवार में कोहराम मच गया। उनके घर पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों की भीड़ जुट गई। शहीद के दिव्यांग पिता और भाई बेसुध हो गए। पूरे गांव में मातम सा छा गया।
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कमरे में पंकज के मैडल और शील्ड
- फोटो : अमर उजाला
जिला मुख्यालय से सटे गांव गंगधरापुर निवासी पंकज दुबे (20) पुत्र शांति स्वरूप दुबे भारतीय सेना में रेडियो ऑपरेटर के पद पर तैनात हुए थे। मौजूदा समय उनकी तैनाती जम्मू कश्मीर के तंगधार इलाके में थी। कानपुर में मार्च 2017 में सेना में भर्ती हुए थे। दिसंबर 2018 में वह छुट्टी लेकर गांव आया था। 55 दिन की छुट्टी बिताने के बाद वह 31 जनवरी को तंगधार रवाना हो गया था।
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पंकज के घर के बाहर लगी लोगों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
29 मार्च को सर्च ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर हुई गोलीबारी में उनके सिर में गोली लग गई थी। उनका इलाज आर्मी के जम्मू स्थित कैंप हॉस्पिटल में चल रहा था। गुरुवार शाम करीब आठ बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हॉस्पिटल में मौजूद उनके भाई रामू दुबे ने दिव्यांग पिता शांति स्वरूप और दिव्यांग भाई जवाहर को फोन पर पंकज के शहीद होने की जानकारी दी।
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पंकज के भाई जवाहर से बातचीत करते भाजपा प्रदेश मंत्री सुब्रत पाठक (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इससे परिवार में कोहराम मच गया। उसके घर पर पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ पंकज के दोस्त पहुंच गए। शहीद के भाई जवाहर दुबे ने बताया कि उसका भाई बहादुर था, दुश्मनों की गोली लगने के बावजूद भी सात दिन तक जिंदगी से जंग लड़ता रहा। शहीद हुए जवान पंकज का परिवार खेतीबाड़ी करता है। पंकज सबसे छोटे थे। उनका बड़ा भाई जवाहर दुबे दिव्यांग है।
घर में रोती पंकज की मां और बहन रूचि (फाइल फाेटो)
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भाई रामू दुबे बेरोजगार हैं। जवाहर ने बताया कि उसने कोचिंग पढ़ाकर भाई को काबिल बनाया था। जबकि बहन रुचि की हाल में ही शादी हुई थी। पंकज के परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है। 25 मार्च को उसने फोन पर बड़े भाई रामू दुबे से कहा था कि जल्द छुट्टी लेकर वह आएगा। मकान की छत डलवाने के बाद ही वह शादी करेगा। पंकज के कमरे में करीब 20 मेडल और शील्ड देखकर उसके हर किसी की आंखें नम हैं।