UP Lok Sabha Election 2024
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कानपुर, हरदोई और सीतापुर की विधानसभा सीटों को जोड़कर बनी मिश्रिख लोकसभा सीट का अपना अलग ही मिजाज रहा है। कभी कांग्रेस के दबदबे वाली इस सीट पर बसपा का भी प्रभुत्व रहा। वर्ष 1996 की जीत के बाद वनवास झेल रही भाजपा ने 2014 की मोदी लहर में वापसी की। तब से यहां भगवा परचम फहरा रहा है।
पार्टी ने मौजूदा सांसद डॉ. अशोक कुमार रावत पर फिर भरोसा जताया है। खास बात है कि इस बार यहां जीजा-सलहज के बीच दिलचस्प चुनावी जंग है। सपा से चुनौती दे रहीं संगीता राजवंशी रिश्ते में डॉ. रावत की सलहज हैं। वहीं, हाथी पर चढ़कर मैदान में उतरे डॉ. बीआर अहिरवार भी बसपा के काडर वोट के साथ दम दिखा रहे हैं।
आरक्षित मिश्रिख संसदीय सीट पर सवर्ण और पिछड़ी जातियों का खासा असर दिखता है, पर पासी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मिश्रिख संसदीय क्षेत्र में सीतापुर की मिश्रिख, कानपुर की बिल्हौर और हरदोई की बालामऊ, मल्लावां व संडीला विधानसभा सीटें आती हैं।
पांचों विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा ने अशोक कुमार रावत को मैदान में उतारा। रावत ने बहुजन समाज पार्टी की डॉ. नीलू सत्यार्थी को एक लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था।
पर, दिलचस्प यह भी है कि भले ही डॉ. नीलू हार गई हों, पर बसपा का वोट शेयर करीब 10 फीसदी बढ़कर 42.25 प्रतिशत पहुंच गया। 2014 में पार्टी का वोट शेयर 32.58 फीसदी रहा था। यह आंकड़ा बताता है कि बसपा ने दम दिखाया तो परिणाम चौंकाने वाले भी हो सकते हैं।
सपा ने चार बार बदले प्रत्याशी, चकरा गए कार्यकर्ता
सपा ने यहां पहले पूर्व मंत्री रामपाल राजवंशी को प्रत्याशी बनाया था। भाजपा प्रत्याशी अशोक रावत के रामपाल राजवंशी चचिया ससुर हैं। इसी बीच खबर आई कि वह दामाद के सामने चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। इस पर सपा ने रामपाल के बेटे मनोज कुमार राजवंशी को टिकट दे दिया। मनोज राजवंशी भाजपा उम्मीदवार के बहनोई हैं।
इसके बाद साले और बहनोई के बीच चुनावी जंग की बिसात बिछने लगी। ऐन वक्त पर सपा ने फिर टिकट बदला और पूर्व सांसद रामशंकर भार्गव को उतार दिया। अगले ही दिन फिर पासा पलटा और इस बार टिकट रामपाल राजवंशी की बहू संगीता राजवंशी को दिया गया। संगीता रिश्ते में भाजपा प्रत्याशी को सलहज (साले की पत्नी) हैं।
नैमिषारण्य में समोसे की दुकान पर मिले सपा समर्थक नरेश अग्रहरि और मनोज सिंह इस बदलाव पर कहते हैं, हम सब तो झंडा उठाए हुए हैं, लेकिन सच कहें तो बार-बार टिकट बदलने से कार्यकर्ता चकरा गए हैं। नरेश ने गहरी सांस लेते हुए कहा, अखिलेश भइया ने कुछ सोचकर ही टिकट बदले होंगे।
नरेश अग्रवाल की भी प्रतिष्ठा दांव पर
हरदोई और मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। भले ही पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल इन दोनों सीटों से कभी चुनाव नहीं लड़े हों, लेकिन यहां की राजनीति में उनका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखता रहा है। यही वजह है कि दोनों सीटें उनकी साख से जुड़ी हैं। भाजपा प्रत्याशी के लिए वह लगातार सभाएं कर रहे हैं।
पढ़ाई से लेकर रेलवे क्रॉसिंग तक पर बात
संडीला पहुंचे तो वहां हमें मेडिकल स्टोर संचालक रीतेश मेहरोत्रा मिले। चुनाव में इस बार मिश्रिख में क्या मुद्दे हैं, इस सवाल पर वह कहते हैं, यहां शैक्षिक संस्थान नहीं हैं। बच्चों को पढ़ने के लिए लखनऊ या कानपुर भेजना पड़ता है। इस वजह से बेटियों की उच्च शिक्षा प्रभावित हो रही है। वहीं, पास के ही एक प्रशिक्षण संस्थान की मधु द्विवेदी, मुस्कान शुक्ला, नैंसी सिंह, श्रद्धा सिंह और ऋतिका चतुर्वेदी कहती हैं कि यहां स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। कपड़ा व्यापारी गौरव मेहरोत्रा कहते हैं, मिश्रिख को जिला बनाने की मांग कई साल से की जा रही है। संडीला में ट्रेनों के ठहराव की मांग भी लंबे अरसे से चली आ रही है। इसपर अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। दिन में औसतन चार घंटे रेलवे क्रॉसिंग बंद रहती है। इससे स्थानीय लोगों को समस्या से जूझना पड़ता है, इसका भी समाधान नहीं हो सका।
खुद ही देख लीजिए, पता चल जाएगा माहौल
बालामऊ विधानसभा के कचौना कस्बा पहुंचे तो रमेश सिंह मिल गए। कैसा माहौल है? इस सवाल पर वे सपा कार्यालय की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं, देख लो। एकौ आदमी नहीं है। रात में दो-तीन गाड़ियां आती हैं और लौट जाती हैं। फिर बोले, आप भाजपा का कार्यालय भी देख लो। सुबह-शाम चाय-पानी के साथ गहमागहमी रहती है। कार्यकर्ता लगा है। भले ही प्रत्याशी के दर्शन न होते हों।
पास ही कोल्ड ड्रिंक से गला तर करने में जुटे दुष्यंत, मनीष चौरसिया, प्रदीप, गौरव गुप्ता, रामशंकर, गौरव मिश्रा तंज कसते हुए कहते हैं, सांसद जी दिखाई नहीं देते। ओवरब्रिज नहीं बना। दिल्ली और लखनऊ का मुख्य रूट है। घंटों जाम लगता है। जलभराव की समस्या है। जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। पर, करें भी तो क्या? लड़ने वाले सभी रिश्तेदारी में हैं। बस नूराकुश्ती चल रही है।
यहां तो सभी कार्यकर्ता अखिलेश को चुनाव लड़ाने कन्नौज चले गए
बिल्हौर का नजारा अलग दिखा। पूछने पर किसान विनय बाबू बोले, इस बार भी कमल का खिलना तय है। क्यों? इस सवाल पर वह बोले-सामने वाले कमजोर हैं। अधिवक्ता केके मिश्रा चाय की प्याली बढ़ाते हुए यही बात दोहराते हैं। वह कहते हैं, यह सच है कि सपा और बसपा से मजबूत प्रत्याशी नहीं होने का फायदा भाजपा को मिल रहा है। बिल्हौर में सपा में आपसी घमासान भी है। रचना सिंह और पूर्व जिलाध्यक्ष के बीच प्रत्याशी को लेकर टकराव का असर भी है। इस वजह से यहां के सपाई अखिलेश को चुनाव लड़ाने कन्नौज चले गए हैं।
नैमिष में राम मंदिर का जबर्दस्त असर
तीर्थस्थल नैमिषारण्य में राममंदिर का व्यापक असर दिखा। चक्रतीर्थ के प्रधान पुजारी राजनारायण और हनुमानगढ़ी के महंत बजरंग दास कहते हैं, राममंदिर की वजह से इस तीर्थ क्षेत्र की स्थिति बदल गई है। श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई है। सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है।
व्यापारी घनश्याम अग्रवाल कहते हैं, अयोध्या में तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ने का असर नैमिष में भी दिख रहा है। यहां भी लोगों की आय बढ़ी है। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी से जो भी नाराजगी थी, उसका असर नहीं दिख रहा। मल्लावां-बिलग्राम में भी माहौल ठंडा दिखा।
जातीय समीकरण
मिश्रिख में अनुसूचित जाति के मतदाता ज्यादा हैं। पासी मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने की वजह से ज्यादातर पार्टियां यहां से इसी जाति के प्रत्याशी को ही खड़ा करती हैं। ओबीसी में कुर्मी, गड़रिया, काछी, कहार और यादव भी काफी संख्या में हैं।
मतदाता समीकरण
हिंदू- 85-90%
मुस्लिम-10-15%
अनुसूचित जाति- 33%
जरनल/ओबीसी- 67%
अन्य-5%
कुल मतदाता-18,73,161
कुल जनसंख्या-2,49,969
शहरी आबादी 09%
ग्रामीण आबादी 91%