बांदा जिले के कमासिन में प्रवासी मजदूर की पत्नी और तीन मासूम बच्चे घर में जिंदा जल गए। जेसीबी से मलवा हटाकर क्षत-विक्षत हो चुके शवों को निकाला गया। माना जा रहा है कि ठंड से बचने के लिए जलाई गई आग ही मां और बच्चों की चिता बन गई।
मृतक महिला भी मजदूरी करती थी। विधायक, डीएम और एसपी ने घटनास्थल का जायजा लिया। मरका थाना क्षेत्र के दुबेन पुरवा (मऊ) में शुक्रवार की रात संगीता देवी (30) पत्नी कल्लू यादव अपने तीन बच्चों बेटी अंजली देवी (8), पुत्र आशीष (6) और बेटी बिट्टी उर्फ असनी (2) के साथ खपरैलदार कच्चे मकान के बंद कमरे में सो रही थी।
पति कल्लू मजदूरी के लिए जयपुर गया हुआ है। रात में किसी समय कमरे में आग लग गई। पूरा मकान आग की चपेट में आ गया। घर में रखे भूसे और लकड़ी ने आग को और विकराल बना दिया। तड़के कुछ पड़ोसी घर के बाहर निकले तो संगीता के घर को जलते देखा।
ग्रामीणों ने मरका थाना पुलिस को सूचना दी और खुद आग बुझाने में जुट गए। कुछ ही देर बाद सुबह फायर ब्रिगेड भी आ गई और किसी तरह आग पर काबू पाया। सुबह करीब नौ बजे पुलिस और ग्रामीणों ने जेसीबी से मलबा हटाकर चारों शवों को बाहर निकाला।
शव पूरी तरह जल चुके थे। इंस्पेक्टर रामाश्रय सरोज ने शवों को कपड़े में बंदकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। विधायक चंद्रपाल कुशवाहा, पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव, पूर्व मंत्री गयाचरन दिनकर, डीएम आनंद कुमार सिंह, एसपी डॉ. एसएस मीणा, एसडीएम सौरभ शुक्ला, सीओ आनंद कुमार पांडेय भी मौके पर पहुंचे।
अपर पुलिस अधीक्षक महेंद्र प्रताप चौहान ने बताया कि फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसकी जांच की जा रही है। मृतक संगीता भी मजदूरी करती थी। चार बीघा जमीन भी बताई गई है।