उत्तर प्रदेश के कानपुर सहित आसपास के 13 जिलों में धूमधाम से होलिका दहन हुआ। इटावा, औरैया, महोबा, फतेहपुर, बांदा, उन्नाव, हमीरपुर, चित्रकूट, कानपुर देहात में होलिका की पूजा करके लोगों ने सुख समृद्धि मांगी। होली के मौके पर कानपुर, आसपास के जिलों और गांवों में विभिन्न स्थानों पर जगह-जगह होलिका सजाई गईं।
लोगों ने दिन में होलिका की पूजा की। इसके उपरांत शाम को साढ़े छह बजे होलिका का दहन हुआ। पुष्प, अक्षत, नारियल से पूजा-अर्चना कर बच्चों संग बड़ों ने भी होलिका की परिक्रमा कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। शहर में होली की तैयारियां बीते कई दिनों से जोर-शोर से चल रहीं थीं।
रविवार को सादीपुर के डाकघर कर्मचारी जयशंकर की अगुवाई में हर साल की तरह कंडे की होलिका लगी। उन्होंने अक्षत, चावल, नारियल आदि से सामग्री से होलिका का पूजन और आरती की। साढ़े छह बजे होलिका का दहन किया गया। इसके बाद फूलों की होली खेली गई। लोगों ने बड़े बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। वहीं देवीगंज में होलिका दहन के बाद ढोल, नगाड़े की धुन पर फाग गाते हुए लोग जमकर थिरके। गुलाल लगाकर एक-दूसरे से गले मिले और मिठाई खिलाई।
होलिका में भूने गए चने और गेहूं
होलिका दहन के समय चने व गेहूं की फसल पकने की कगार पर होती है। ऐसे में लोग होलिका की अग्नि में चना और गेहूं की बालियों को भूनकर लाते हैं। घर में प्रसाद के रूप में उसे वितरित किया जाता है। प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख, समृद्धि आती है। होलिका दहन के साथ ही वसंत ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत होती है।