तमाम विरोधों को दरकिनार करते हुए सरकार ने निर्माणियों के निगमीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। निर्माणियों में नियुक्त कंसल्टेंट की मदद के लिए निर्माणियों में नोडल अफसर भी तैनात कर दिए गए हैं। इस संबंध में 31 दिसंबर को आयुध निर्माणी बोर्ड ने आदेश जारी कर दिया है। सरकार ने निगमीकरण से पहले निर्माणियों के अध्ययन के लिए केपीएमजी कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त किया था।
हालांकि कंपनी के प्रतिनिधि जब निर्माणियों में जाते थे तो इनका विरोध होता था। इसके चलते उन्हें जानकारी नहीं मिल पाती थी। इसको देखते हुए सरकार ने निर्माणियों के अफसरों को नोडल अधिकारी बना दिया और उन्हें कंपनी द्वारा मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। अलग-अलग निर्माणियों में 17 अफसरों की नियुक्ति की गई है। शहर की निर्माणियों में भी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। अफसरों की टीम सात स्तरों पर काम करेगी।
एक अधिकारी को ओवरऑल संयोजक बनाया गया है। इसके अलावा निर्माणियों की सप्लाई चेन, व्यावसायिक एकाउंट सिस्टम, आधारभूत ढांचा, मौजूदा आर्डर, उत्पाद, कारोबार संबंधी विभाग के लिए अधिकारी बनाए गए हैं।
केंद्रीय विद्यालयों में मर्ज होंगे निर्माणियों के स्कूल
सूत्रों के अनुसार निर्माणियों के प्रबंधन में संचालित स्कूल, कॉलेज आदि को केंद्रीय विद्यालयों में मर्ज कर दिया जाएगा। इसका संचालन निर्माणी प्रबंधन के पास नहीं रहेगा। इसके अलावा हर निर्माणी के अलग-अलग अस्पतालों के स्थान पर केवल एक अस्पताल ही संचालित होगा। अन्य अस्पतालों को सीजीएचएस में विलय किया जाएगा।