विशेषज्ञता वाले संस्थान को दी जाएगी जिम्मेदारी
इससे घायलों को टांके आदि कटवाने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। हैलट परिसर में सेंटर के लिए स्थान पहले से ही चिह्नित कर लिया गया। इसके अलावा मिट्टी की गुणवत्ता आदि की भी जांच हो गई है। शासनादेश में भवन निर्माण की गुणवत्ता के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल की लागत को भी अनुमन्य कर दिया गया है। इसके लिए किसी विशेषज्ञता वाले संस्थान को जिम्मेदारी दी जाएगी। यह संस्था नींव से लेकर छत के लिंटर आदि का जायजा लेती रहेगी। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के स्तर से भी एक कमेटी गठित होगी जो मेडिकल गैस, मॉड्युलर ओटी, एसएस कंट्रोल सिस्टम आदि का निर्धारण करेगी।
यह विभाग रहेंगे ट्रॉमा सेंटर में
अस्थि रोग, सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, स्पाइन इंजरी, क्रिटिकल केयर, ट्रामाटोलॉजी कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, इमरजेंसी मेडिसिन, बालरोग, नेत्र रोग, दंत रोग, रेडियोलॉजी, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, डायग्नोस्टिक लैब, पैथोलॉजी, स्किल लैब आदि।
लेवल-1 एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में आम सेंटर की तुलना में यह सुविधाएं अधिक रहतीं
- एयर एंबुलेंस से घायलों को हाईवे से एयर लिफ्ट कर लिया जाएगा।
- गंभीर घायलों को जल्दी से इलाज मिल सकेगा।
- एंबुलेंस में आने पर भीड़भाड़, जाम की दिक्कत नहीं झेलनी पड़ेंगी।
- रोगियों को दूसरी विशेषज्ञता से संबंधित दिक्कत होने पर शिफ्ट नहीं करना पड़ेगा।
- आंख, दांत, नेत्र, नस, हड्डी, आपरेशन से संबंधित सारी सुविधाएं एक छत के नीचे रहेंगी।
- घायल के सिर में खून का थक्का जमने पर इंटरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग इलाज कर देगा।
- जरूरत पड़ने पर हार्ट की, खाने और सांस की नली की भी वहीं सर्जरी की व्यवस्था रहेगी।
- पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक संबंधी सारी जांचें वही हो जाएंगी।