शहर के अधिकतर सपा नेता शुक्रवार को भी लखनऊ में डेरा डाले रहे। कई मुख्यमंत्री के तो कई सपा सुप्रीमो के आवास के इर्द-गिर्द मंडराते रहे। वक्त के साथ उनके दिलों की धड़कनें भी घट-बढ़ रही थीं। किसी को प्रत्याशियों की सूची से नाम हटने का का डर था तो किसी को नाम शामिल होने की उम्मीद। कई तो सपा के संग्राम में सुलह की उम्मीद भी लगाए थे। दिन भर कयास लगते रहे, कुछ नेता शहर लौट आए तो कुछ वहीं डेरा जमाए हैं।
समाजवादी पार्टी के स्थानीय सपाइयों का दिन आजकल लखनऊ में ही बीत रहा है। शुक्रवार को भी नगर, ग्रामीण और देहात इकाई के पदाधिकारी और टिकट के दावेदार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आवास 5 केडी (कालीदास मार्ग) और मुलायम सिंह यादव के आवास विक्रमादित्य मार्ग पर दिन भर डटे रहे।
मुख्यमंत्री और नेताजी के आवास के अंदर वरिष्ठ नेताओं के बीच क्या चल रहा है, सपाई यही जानने का दिन भर प्रयास करते रहे। शहर अध्यक्ष फजल महमूद का कहना है कि अभी भी उम्मीद टूटी नहीं है लेकिन मामला जितनी जल्दी सुलझ जाए उतना ही अच्छा है। अध्यक्ष ने बताया कि वह सुबह ही लखनऊ पहुंच गए थे। करीब पांच बजे वापस आए। ज्यादातर सपाई रात में भी लखनऊ में ही रुके हैं। इसी तरह पूर्व में घोषित जिन प्रत्याशियों का नाम अखिलेश और मुलायम दोनों की सूची में हैं उन्हें भी लगता है कि मामला शांत हो जाएगा और चुनाव में उनकी वापसी फिर से हो जाएगी। नगर ग्रामीण इकाई के पदाधिकारी उपेंद्र यादव का कहना है कि शनिवार की सुबह जरूर कुछ अच्छा संदेश आएगा, सभी लोग जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में जमे हुए हैं। पूर्व नगर अध्यक्ष चंद्रेश सिंह, व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डा. जेएस सचान, पूर्व पदाधिकारी बंटी यादव, अर्पित यादव भी इसी उम्मीद में लखनऊ में रुके हैं। सुरेंद्र मोहन अग्रवाल की नेताजी से भी कई बार बात हुई है।