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‘तलाशो बिखरी जड़ें, तभी हो पाओगे खड़े’

Mon, 02 Feb 2015 02:30 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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कांग्रेसी अपनी बिखरी जड़ें तलाशने की नई योजना बना रहे हैं। पार्टी को सशक्त बनाने के लिए नए नए आइडिया की जरूरत है। इसकी खोज में पार्टी अब टेक्नोक्रेट और ब्यूरोक्रेट की लाबी तैयार कर रही है।
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रविवार को जनपद में इसकी शुरुआत भी हो गई। प्रांतीय इकाई की तरफ से कानपुर नगर ग्रामीण इकाई के आब्जर्वर नियुक्त किए गए राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने तिलक हाल में बुद्धजीवियों के साथ बैठक की।

सभी को नए आइडिया देने के लिए प्रोफार्मा भी दिया। जिसे भरकर पांच फरवरी तक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक भेजा जाएगा। 

इस अवसर पर नगर ग्रामीण अध्यक्ष अभिजीत सिंह सांगा ने कहा कि पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए अभियान शुरू करेंगे।

बैठक में भूधर नारायण, महेश दीक्षित, हाफिज उमर, धर्मराज, नंदराम, सियाराम पाल,  नरेश त्रिपाठी, कमल शुक्ल बेबी, अनिल पाण्डेय, प्राशु सिंह, आनंद, ऊषारानी, अंबुज शुक्ला, वैभव, विकास, दीपू, तुफैल, पूर्णिमा आदि मौजूद रहे।
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कांग्रेस का स्वरूप बदलने के लिए 11 बिंदु

विचारधारा-कौन सा ऐसा विषय है जो अभी तक छूट रहा है, अब उस पर विचार की जरूरत है।

सत्ता वितरण-बूथ स्तर से प्रांतीय स्तर की तरफ विभाजन।

पार्टी-सरकार हस्तक्षेप-जहां पर पार्टी सत्ता में है वहां संगठन-सत्ता के बीच समन्वय कैसे सुनिश्चित हो।  

चर्चा का मंच-पार्टी की कमेटियों को चर्चा मंच के रूप में स्थापित करना, जिससे नई बातें सामने आएं।

जवाबदेही-पार्टी पदाधिकारियों के कार्यों की समीक्षा।

अनुशासन-किन कार्यों और व्यवहार को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा जाए।  

चुनाव-कमजोर टिकट वितरण व्यवस्था पर पार्टी कैसे जबाव देह बने। कितने पहले टिकट घोषित किया जाए।

प्रतिनिधित्व-एससी, एसटी और ओबीसी को संगठन में प्रतिनिधित्व कैसे दिया जाए।

 विभाग, प्रकोष्ठ-इन्हें उचित काम के लिए कैसे सशक्त बनाया जाए।

बूथ समितियां-कैसे सुनिश्चित हो कि इसमें सक्रिय प्रतिभाग होना चाहिए।

काडर, जनसंपर्क और मीडिया-संवाद के स्तर पर जाकर पार्टी को किस तरह मजबूत किया जाए।
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