लेह में तैनात चकेरी के भवानी नगर रामपुरम, श्यामनगर निवासी सेना में कैप्टन अभिषेक मिश्रा (29) की हादसे में मौत हो गई। वह शुक्रवार को कैप्टन पत्नी श्रीलेखा भरत और ड्राइवर के साथ लेह में चल रही साइट देखने जा रहे थे। तभी बर्फबारी के कारण ड्राइवर कार का नियंत्रण खो बैठा। बगल की सीट पर बैठे अभिषेक ने स्टेयरिंग संभालते हुए पत्नी और ड्राइवर को कूदने के लिए कहा।
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उनके कूदते ही कार खाई में गिर गई। अभिषेक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। ड्राइवर को भी चोटें आईं। रविवार को उनका शव चकेरी स्थित घर लाया गया। एक सैनिक की तरह वर्दी पहनकर पति का शव लेकर आई कैप्टन पत्नी को देख सभी की आंखें नम हो गईं। सिद्धनाथ घाट पर अभिषेक का अंतिम संस्कार हुआ।
मूलरूप से कन्नौज के तालग्राम निवासी संतोष कुमार मिश्रा शहर में मास्टर वारंट ऑफिसर हैं। पिछले चार सालों से कानपुर में ही तैनात हैं। बेटे कैप्टन अभिषेक मिश्रा लेह में 51 आरसीसी यूनिट में तैनात थे। वह सेना के इंजीनियरिंग विभाग में थे। हैदराबाद निवासी पत्नी श्रीलेखा भरत भी सेना में कैप्टन हैं। उनकी पोस्टिंग श्रीनगर है।
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जानकारी के अनुसार दंपती कुछ दिनों की छुट्टियों पर था। तीन जनवरी को ही कैप्टन अभिषेक ने लेह में ड्यूटी ज्वाइन की थी। पत्नी श्रीलेखा भरत भी उनके साथ थीं। श्रीलेखा को 15 जनवरी को श्रीनगर में ड्यूटी ज्वाइन करनी थी। शुक्रवार को अभिषेक जिप्सी कार से एक साइट देखने जा रहे थे, पत्नी भी उनके साथ थीं। तभी हादसा हो गया।
हादसे के बाद हेलीकॉप्टर से अभिषेक का शव चंडीगढ़ फिर वहां से एयरफोर्स के एन - 32 विमान से चकेरी एयरफोर्स एयरपोर्ट लाया गया। रविवार दोपहर 3:25 बजे एयरपोर्ट से अभिषेक का शव घर पहुंचाया गया। लेेह से ही पति के शव के साथ पत्नी रहीं। उनके सिर पर गंभीर चोटें लगी हैं। वह अपने दर्द को भूल सिर्फ अभिषेक को याद करतीं रहीं।
घर पर मचा कोहराम
शव देखते ही मां राजलक्ष्मी बेसुध हो गईं। बुजुर्ग नानी राजेस्वरी अवस्थी खुद को कोसती रहीं कि नानी अभी बैठी है, और नाती चला गया...। आहत पिता खुद को टूटने से बचाते रहे। उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों को हिम्मत बांधी। लेकिन अपने लाल का शव देखते ही दर्द छलक गया। फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें रोता देख सभी की आंखें नम हो गईं। वहीं घायल पत्नी अभिषेक को बस निहारती रहीं। दो साल पहले जुड़ा रिश्ता ऐसे टूटेगा किसी ने सोचा नहीं था। अभिषेक और श्रीलेखा की शादी 2020 में हुई थी। दोनों ने कई सपने संजोए थे।
सिद्धनाथ घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
इस दौरान सेना के अधिकारी और जिला प्रशासन व पुलिस के अफसर भी रहे। उन्होंने दुखी परिवार को हिम्मत के साथ शहीद को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। साथ की कई राजनीतिक व इलाके के लोग कैप्टन को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अभिषेक को अंतिम विदाई दी गई। सिद्धनाथ घाट पर बड़े भाई अविनाश मिश्रा ने मुखाग्नि दी।
सेना, प्रशासन के अफसरों ने दी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि के दौरान डीएम विशाख जी, डीसीपी पूर्वी प्रमोद कुमार, एसीएम सेकेंड आकांक्षा गौतम, सेना के अधिकारियों में मेजर एलएस चंदेल, लेह में तैनात कैप्टन गौरव, कैप्टन अतुल, पूर्व सैनिक पीके त्रिपाठी समेत अभिषेक के दोस्त भी रहे।
सांसद और मंत्री ने दी श्रद्धांजलि
अभिषेक को श्रद्धांजलि और परिजनों को सांत्वना देने सांसद सत्यदेव पचौरी, एमएलसी अरुण पाठक पहुंचे। सिद्धनाथ घाट पहुंचे कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, विधायक सोहेल अंसारी, पूर्व विधायक रघुनंदन भदौरिया ,एमएलसी राजबहादुर सिंह चंदेल ,निर्देश चौहान, मलखान सिंह, भानु शुक्ला, प्रमोद मिश्रा, अरविंद यादव, ज्ञानेन्द्र सिंह, हरिश्चन्द्र सिंह, अजय तोमर ने दुखी परिवार को ढांढस बंधाया।
जून में मिलने का किया था वादा
कैप्टन अभिषेक के बड़े भाई अविनाश एचडीएफसी बैंक में सर्किल हेड हैं। वह चेन्नई में तैनात हैं। भाभी पूर्णिमा ने अभिषेक दिसंबर में छुट्टी पर चेन्नई आए थे। फिर 14 दिसंबर को हैदराबाद स्थित ससुराल चले गए थे। भाइयों ने तय किया था कि जून में पिता का रिटायरमेंट है। इसलिए सभी कानपुर आने वाले थे।
पिता बोले, मेरा बेटा शेर था
अभिषेक को 2012 में सेना में कमीशन मिला था। 2015 में रैंक मिली थी। हायर एजूकेशन मुंबई से की थी। पिता संतोष कुमार बोले, मेरा बेटा शेर था, उसके अंदर डर नाम की कोई चीज नहीं थी। इसके साथ उन्होंने कैप्टन बहू श्रीलेखा और पत्नी राजलक्ष्मी को हिम्मत दी।